देहाती कामुक रोमांस · 3 episodes · 10:44 · Jul 24
अस्पताल से स्विट्जरलैंड तक का सफर : भाग 2
switzerland me chudai
Episode 2
Shanaya
दोस्तों, आपका स्वागत है अतिवासना की एक और भावुक कहानी में। आज हम सुनेंगे 'अस्पताल से स्विट्जरलैंड तक का सफर' का दूसरा भाग, जहाँ प्यार, दर्द और नई शुरुआत की कहान
दोस्तों, आपका स्वागत है अतिवासना की एक और भावुक कहानी में। आज हम सुनेंगे 'अस्पताल से स्विट्जरलैंड तक का सफर' का दूसरा भाग, जहाँ प्यार, दर्द और नई शुरुआत की कहानी और गहरी होती है। दुर्गा और रोहित की जोडी अब एक नए मोड पर आ गई है, जहाँ भाग्य उन्हें अलग कर देता है, लेकिन जिंदगी एक नया रास्ता दिखाती है। तो चलिए, शुरू करते हैं।
कुछ हफ्तों बाद रोहित दुर्गा को शहर के बडे अस्पताल ले गया। ऑपरेशन में कई घंटे लगे, और फिर डॉक्टर ने दुर्गा की आँखों पर पट्टी बाँध दी - "एक हफ्ते बाद पट्टी खुलेगी, तब देखना शुरू होगा।" दुर्गा अस्पताल के बेड पर लेटी थी, उसकी आँखों पर सफेद पट्टी, लेकिन उसके होठों पर मुस्कान थी - क्योंकि रोहित उसके साथ था। रोहित हर रात आता, उसके बाल सहलाता, उसे कहानियाँ सुनाता, और उसके हाथ को चूमता। एक रात जब नर्स ने कमरा छोडा, तो रोहित अंदर आया और दरवाज़ा बंद कर दिया।
दुर्गा ने उसकी आवाज़ पहचानी, "तुम आ गए? आज तुम्हें देर हो गई।" रोहित उसके पास बैठा, उसका हाथ पकडा, और उसके होठों पर चुंबन किया - धीरे-धीरे, गहरा, और भावुक। दुर्गा ने उसकी गर्दन पकडी और उसे और पास खींचा, "मुझे तुम्हारी ज़रूरत है, रोहित... अभी। मुझे तुम्हारे शरीर की ज़रूरत है।" रोहित ने धीरे-धीरे दुर्गा का अस्पताल का गाउन ऊपर किया - नीचे बिल्कुल कुछ नहीं था। उसके स्तन खुले हुए, निप्पल पहले से ही कडे, उसकी कमर पर नीली नसें, और नीचे उसकी चूत की काली वनस्पति साफ दिख रही थी। रोहित ने अपनी जींस खोली, और उसका लंड बाहर निकाला - पहले से ही सीधा, मोटा, और गर्म।
"इसे चूसो, दुर्गा," रोहित ने कहा, और दुर्गा ने बिना देरी किए उसे अपने मुँह में ले लिया। उसने पूरा लंड गहराई तक लिया, उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूमी, और फिर वह तेज़ी से आगे-पीछे करने लगी। रोहित ने उसके बालों में हाथ डाला, उसका सिर दबाया, "हाँ... वही... और गहरा..." दुर्गा ने अपनी सारी कला लगा दी - उसकी जीभ ने लंड के हर हिस्से को चाटा, उसके होंठ कसकर बंद थे, और वह बारी-बारी से चूस रही थी और जीभ से घुमा रही थी। रोहित की साँसें तेज़ हो गईं, "बस... बस... मैं आ रहा हूँ..." लेकिन दुर्गा रुकी नहीं, उसने और तेज़ी से चूसा, और फिर रोहित का वीर्य उसके मुँह में भर गया - गर्म, गाढा, और इतना ज्यादा कि उसके होठों से बाहर निकलने लगा। दुर्गा ने सब कुछ निगल लिया, और फिर अपना चेहरा ऊपर उठाया, "अब मेरी बारी है, रोहित।"
रोहित ने दुर्गा को बिस्तर पर लिटाया, उसकी जांघें फैलाईं, और अपनी जीभ बाहर निकाली। उसने उसकी चूत को चाटना शुरू किया - धीरे-धीरे, गोल-गोल, और फिर अंदर गहराई तक। दुर्गा की चूत पहले से ही रस से भरी हुई थी, और रोहित की जीभ ने उसे और गीला कर दिया। दुर्गा ने अपनी उँगलियाँ उसके बालों में फँसा लीं, उसे पास खींचा, "रुको... जीभ से मत... अपना लंड अंदर डालो, अब।" रोहित ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा, और धीरे-धीरे अंदर धकेला। दुर्गा की चूत ने उसे गर्मजोशी से भर दिया, और रोहित ने तेज़ धक्के मारना शुरू कर दिया। दुर्गा के स्तन उछल रहे थे, वह कराह रही थी, "हाँ... हाँ... और तेज़... मुझे मत रोको..." रोहित ने उसे पलटा, पीछे से डाला, और पूरी ताकत से धक्के मारे। उसके नितंबों पर रोहित के हाथों के निशान पड रहे थे, और दुर्गा अपनी उँगलियाँ बिस्तर में गडा रही थी, "मैं आ रही हूँ... रोहित... मैं..." और फिर वह चरम पर पहुँच गई, उसकी चूत ने रोहित के लंड को जोर से दबोचा, और ठीक उसी पल रोहित ने भी स्खलित किया। दोनों के रस एक साथ बह निकले, और वे थककर एक-दूसरे के बगल में गिर पडे।
रोहित ने दुर्गा के कान में कहा, "कल पट्टी हटेगी, तुम मुझे देख सकोगी। और फिर मैं गाँव जाऊँगा, शादी की तैयारी करूँगा, और वापस आऊँगा। तुम मेरी हो, दुर्गा, हमेशा।" अगली सुबह डॉक्टर ने दुर्गा की पट्टी हटाई - वह रोशनी से चौंधिया गई, उसे सब धुंधला दिखा, लेकिन फिर उसने रोहित को देखा - वही चेहरा जो उसने अपने हाथों से महसूस किया था, वही होंठ जिन्हें उसने चूमा था, वही आँखें जिन्होंने उसे प्यार किया था। उसने उसकी तरफ हाथ बढाया और कहा, "तुम बहुत खूबसूरत हो, रोहित। मुझे तुमसे प्यार है।" रोहित ने उसे गले लगाया, "मैं तुमसे भी ज्यादा प्यार करता हूँ। अब मैं गाँव जा रहा हूँ, कुछ दिनों में लौटूँगा, और फिर शादी।"
लेकिन रोहित गाँव गया, तो राणा ने पीछे से पत्थर मारा - रोहित बेहोश हो गया, उसे अस्पताल ले जाया गया, और वह छह महीने कोमा में रहा। डॉक्टरों ने कहा कि वह शायद ज़िंदा नहीं बचेगा, और गाँव वालों ने दुर्गा को बताया कि रोहित मर गया। दुर्गा बिल्कुल टूट गई। उसने रोने-धोने का नाटक किया, लेकिन उसके अंदर एक खालीपन था - वह रोहित के बिना नहीं रह सकती थी। डॉक्टर प्रसाद, जिन्होंने उसका ऑपरेशन किया था, उसे स्विट्जरलैंड ले गए, "बेटी, नई जगह, नई ज़िंदगी, रोहित तुम्हें ऊपर से देख रहा होगा, वह तुम्हें खुश देखना चाहेगा।"
स्विट्जरलैंड में बर्फ थी, ठंड थी, लेकिन दुर्गा अकेली थी। वह एक बगीचे में बैठी थी - बर्फ की चादर, पहाड, और ठंडी हवा। उसका शरीर अब भी जवान था - उसके स्तन भरे हुए, कमर पतली, नितंब मोटे, और जांघें मजबूत। तभी एक आदमी आया - राज। उम्र 30 साल, अमीर कारोबारी, 5 फुट 11 इंच, शरीर जिम में बना हुआ - चौडी छाती, पेट पर सिक्स पैक, बाजूएँ मजबूत, और आँखों में एक चमक। उसने कहा, "तुम यहाँ अकेली क्या कर रही हो? क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ?" दुर्गा ने मुँह फेर लिया, "मुझे किसी की मदद नहीं चाहिए।" लेकिन राज ने हार नहीं मानी। वह रोज़ आता, बातें करता, दुर्गा को बर्फ़ में घुमाने ले जाता, और धीरे-धीरे दुर्गा उस पर भरोसा करने लगी।
एक रात राज के घर पर डिनर था - मोमबत्तियाँ, महँगी शराब, और रोमांटिक संगीत। दुर्गा ने दो गिलास शराब पी ली, उसके गाल लाल हो गए, उसकी साँसें भारी हो गईं, और उसकी आँखों में नशा झलक रहा था। राज ने उसका हाथ पकडा, "दुर्गा, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। मैं जानता हूँ कि तुम्हारा दर्द बहुत बडा है, लेकिन मैं तुम्हें खुश कर सकता हूँ। मेरे साथ रहो, मैं तुम्हें कभी दुखी नहीं होने दूंगा।" दुर्गा ने उसकी ओर देखा - राज की आँखें ईमानदार थीं। राज ने धीरे-धीरे अपने होठों को दुर्गा के होठों पर रखा। पहले हल्का सा, फिर गहरा। उसकी जीभ दुर्गा के मुँह के अंदर गई, और दुर्गा ने जवाब दिया - उसकी जीभ राज की जीभ से लिपट गई। राज का हाथ उसकी कमर पर था, उसने धीरे-धीरे उसे ऊपर की तरफ सरकाया, और उसके स्तनों को छुआ - वे कडे हो चुके थे।
राज ने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने धीरे-धीरे उसकी साडी खोली, ब्लाउस उतारा, और उसके स्तन बाहर आ गए - बडे, गोल, और निप्पल कडे। राज ने उन्हें चूसा, उसकी जीभ निप्पल पर गोल-गोल घूमी, और दुर्गा कराह उठी। राज ने उसकी पेटीकोट नीचे की, उसकी जांघों को सहलाया, और फिर उसकी चूत को छुआ - वह पहले से ही भीगी हुई थी। राज ने अपनी जींस खोली, और उसका लंड बाहर निकाला - मोटा, लंबा, सिरा लाल, नसें उभरी हुई, और पूरी तरह सीधा। "तुम बहुत गीली हो, दुर्गा," राज ने कहा, और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। उसने धीरे-धीरे अंदर धकेला, और दुर्गा ने उसे अंदर महसूस किया - यह रोहित जैसा ही था, लेकिन राज की हरकतें अलग थीं। राज ने तेज़ धक्के मारे, दुर्गा के स्तन उछल रहे थे, और वह कराह रही थी, "हाँ... हाँ... और तेज़..." राज ने उसे पलटा, पीछे से डाला, और पूरी ताकत से धक्के मारे। दुर्गा की चूत उसके लंड को कसकर दबोच रही थी, उसका रस राज की जांघों पर बह रहा था, और राज ने उसके कान में कहा, "मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूँगा, दुर्गा।"
उस रात दुर्गा ने राज के साथ तीन बार संभोग किया - एक बार बिस्तर पर, एक बार बाथरूम में, और एक बार कुर्सी पर। हर बार राज का वीर्य उसके अंदर भर गया। हालाँकि संतुष्टि थी, लेकिन उसके मन में एक खालीपन था - क्या वह रोहित को भूल पाएगी? क्या वह राज के साथ खुश हो पाएगी? कुछ हफ्तों बाद, दुर्गा ने राज से शादी करने का फैसला किया।
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दोस्तों, आज की कहानी है अंधेरी रातों के पहले स्पर्श और प्यार के जन्म की। ये कहानी है राजस्थान के एक छोटे से गाँव की, जहाँ एक अंधी लडकी दुर्गा रहती थी, जिसकी उँग
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