भाभी · 22:06 · Aug 4

जब भाभी ने देवर को चोदना सिखाया

When the sister-in-law taught her brother-in-law how to fuck.

Vedish · Reva · Yatin

N: [गहरी, धीमी, और भावुक पुरुष आवाज़ में] "दोस्तों, आज की कहानी है एक 32 साल की अनुभवी महिला रूचि की, जो अपने 22 साल के देवर अमन को सेक्स का पूरा पाठ पढ़ाती है।

रात के 10 बज रहे थे। घर में पूरा सन्नाटा था – विक्रम ऑफिस की रात-ड्यूटी पर गया हुआ था। रूचि और अमन ड्रॉइंग रूम के सोफे पर बैठे थे। रूचि ने ढीली साड़ी पहनी थी – उसके ब्लाउज़ के ऊपरी बटन खुले थे, उसकी गहरी क्लीवेज साफ दिख रही थी। अमन बनियान और लुंगी में था – उसके कंधे चौड़े थे, बाँहों में मछलियाँ थीं। चाय की प्यालियाँ सामने रखी थीं, लेकिन किसी का ध्यान चाय पर नहीं था।

रूचि ने तीखी, शरारती आवाज़ में कहा – "अरे रुक अमन, इतनी जल्दी कहाँ चला? अभी तो बैठा था, पता नहीं क्यों दिन भर से मुझसे आँखें चुरा रहा है? क्या बात है, मुझसे डर लगता है क्या?"

अमन घबराया हुआ था। उसने झिझकते हुए कहा – "नहीं रूचि भाभी... मैं तो... बस खाना खा लूँ फिर सो जाऊँगा, कल सुबह कॉलेज है। बहुत थक गया हूँ आज।"

रूचि हँसी – "कॉलेज! कल तो रविवार है, मेरे नौजवान। क्या बहाना बना रहा है? और थका हुआ तू तो तभी होता है जब मैं सामने होती हूँ। बाकी दिन तो बड़ा चुस्त-दुरुस्त रहता है।"

अमन शरमा गया – "भाभी... ऐसा नहीं है... आप तो मुझे चिढ़ा रही हैं।"

रूचि धीरे से उसके करीब आई – "चिढ़ा रही हूँ? या सच कह रही हूँ अमन? मुझे पता है तू मुझे देख रहा है, दिन भर से। तेरी नज़र मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी चूचियों पर थी। मैंने देखा... जब मैं रसोई में थी, तब भी तू पीछे से मेरे चूतड़ों को घूर रहा था।"

अमन काँप गया – "रूचि भाभी... मैं... मैं ऐसा कुछ नहीं कर रहा था... आप मुझे गलत समझ रही हैं..."

रूचि ने धीमी, फुसफुसाती आवाज़ में कहा – "अच्छा? तो ये बता अमन – तेरे कपड़ों के नीचे क्या छिपा है जो अभी खड़ा हो गया? मैं तेरी लुंगी में उभार देख सकती हूँ, मेरे नौजवान।"

अमन ने शरमाते हुए कहा – "भाभी... प्लीज़... मुझे जाने दो..."

रूचि ने उसकी ठुड्डी पकड़ी – "डर मत अमन। मैं तुझे कुछ नहीं करूंगी। लेकिन सच बता – तू मुझे चाहता है?"

अमन की आवाज़ काँप रही थी – "रूचि भाभी... आप मेरी भाभी हैं... मैं... मैं ये नहीं कर सकता..."

रूचि ने उसके कान में फुसफुसाया – "पर मैं कर सकती हूँ अमन। और आज रात मैं तुझे सब कुछ सिखाऊँगी – वो सब जो तेरा भाई विक्रम मुझसे नहीं करता, वो सब जो एक औरत को चाहिए। तू सिर्फ मेरी बात मानना। मैं क्या कहूँ वही करना, सवाल मत पूछना। तैयार है?"

अमन ने गहरी साँस ली – "हाँ... रूचि भाभी... मैं तैयार हूँ..."

और फिर रूचि ने उसे सिखाना शुरू किया – कैसे एक लड़की को छूना है, कैसे उसे पिघलाना है, कैसे उसके शरीर की हर बारीकी को समझना है।

"पहली बात अमन," उसने फुसफुसाया – "कभी भी सीधा लंड मत निकाल। पहले लड़की को तैयार कर, उसे चूम, उसे छू, उसे महसूस करने दे कि तू उसे चाहता है – सिर्फ चाहता नहीं, बल्कि उसके शरीर का हर हिस्सा चाहता है।"

रूचि ने अमन के होठों पर धीरे-धीरे चूमा – पहले ऊपरी होंठ, फिर निचला, फिर धीरे-धीरे अपनी जीभ उसके मुँह के अंदर ले गई। अमन ने मुँह खोला, और रूचि की जीभ उसकी जीभ से उलझ गई।

अमन हाँफ उठा – "रूचि भाभी... क्या कर रही हो... ये तो... बहुत अच्छा लग रहा है..."

रूचि मुस्कुराई – "यह तो अभी शुरुआत है अमन। अब मुझे गले लगा... पूरे जोर से... अपने हाथों को मेरी पीठ पर... धीरे-धीरे नीचे करते हुए... और मुझे महसूस कर..."

अमन काँपते हाथों से उसे गले लगाया, और धीरे-धीरे उसकी पीठ पर हाथ फिराया – उसकी चिकनी, मुलायम त्वचा को छूता रहा।

"रूचि भाभी..." उसकी साँसें भारी थीं – "आपकी पीठ बहुत मुलायम है... और चिकनी..."

रूचि ने उसके कान में फुसफुसाया – "अब अपना हाथ नीचे ले अमन... मेरी साड़ी के नीचे... मेरे चूतड़ों पर... हाँ, धीरे-धीरे दबा... और अब मेरी जांघों पर... कितनी गीली हैं मेरी जांघें, बोल?"

अमन का हाथ धीरे-धीरे उसकी जांघों पर गया – "बहुत गीली... रूचि भाभी... आपके यहाँ से पानी निकल रहा है..."

रूचि कराह उठी – "यही तो होता है जब लड़की तैयार होती है अमन – उसकी चूत से रस बहने लगता है। इसे तुझे पहचानना होगा। अगर चूत गीली नहीं है, तो लंड मत डालना – उसे पहले तैयार कर। समझा?"

"हाँ रूचि भाभी... समझ गया..."

"अब अपना मुँह मेरे मम्मों पर लगा अमन... मेरे ब्लाउज़ के बटन खोल... धीरे-धीरे... एक-एक करके..."

अमन ने रूचि के ब्लाउज़ के बटन खोले – एक-एक करके – उसकी उँगलियाँ काँप रही थीं। और फिर उसने रूचि के बड़े, कोमल मम्मों को देखा – बिल्कुल सामने, खुले हुए, उसके निप्पल पहले से ही खड़े हुए थे।

"रूचि भाभी... आपके मम्मे बहुत बड़े हैं... और मुलायम..."

रूचि ने आँखें बंद कर लीं – "चूस अमन... अपनी जीभ से... पहले सिर्फ निप्पल की टिप... बहुत हल्का... जैसे तू किसी तितली को छू रहा हो... और फिर धीरे-धीरे जोर से दबा... हाँ... और अब पूरे निप्पल को मुँह में ले... चूस... और अपनी जीभ से गोला बना... जैसे तू आइसक्रीम चाट रहा हो..."

अमन धीरे-धीरे रूचि के निप्पल को चूसने लगा – पहले टिप, फिर पूरा – उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूम रही थी।

"रूचि भाभी... बहुत मीठा लग रहा है..."

रूचि जोर से कराह उठी – "हाँ... बहुत अच्छा अमन... अब दूसरे को भी वैसे ही... और अपना हाथ नीचे ले... मेरी पेटीकोट के नीचे... मेरी चूत पर... और धीरे-धीरे रगड़..."

अमन दूसरे मम्मे को चूसता रहा, और अपना हाथ रूचि की पेटीकोट के नीचे ले गया – वह उसकी गीली चूत को महसूस कर रहा था।

"रूचि भाभी... बहुत गीला है... और गर्म... और आपके बाल भी हैं यहाँ..."

"ये हैं मेरे झाँट अमन – औरत के चूत के बाल। कुछ औरतें साफ करवा लेती हैं, कुछ नहीं – यह पसंद पर निर्भर है। अब अपनी उँगली से... मेरी चूत के ऊपर के हिस्से को छू... जहाँ मेरी क्लिटोरिस है... बहुत हल्का..."

अमन ने अपनी उँगली से रूचि की क्लिटोरिस को छुआ – बहुत हल्का, जैसे पंख से छू रहा हो।

"रूचि भाभी... ये छोटी सी गोली है न?"

रूचि तीखी साँस लेकर कराह उठी – "हाँ... वहीं अमन... अब धीरे-धीरे गोला बना... बहुत हल्का... जैसे पंख से छू रहा हो... और मेरी साँसों को सुन..."

अमन बहुत धीरे-धीरे रूचि की क्लिटोरिस पर गोला बनाता रहा। रूचि की साँसें तेज़ हो गईं।

"हाँ... अब अपनी उँगली को नीचे ले अमन... मेरी चूत की लिप्स के बीच में... और धीरे-धीरे अन्दर घुसा..."

अमन धीरे-धीरे अपनी उँगली रूचि की चूत के अंदर घुसाता है – वह गर्म, गीली, और बहुत कोमल दीवारों को महसूस करता है।

"रूचि भाभी... बहुत गर्म है... और गीला... और मेरी उँगली पूरी अंदर जा रही है..."

"हाँ... अब आगे-पीछे कर अमन... धीरे-धीरे... और ऊपर की तरफ़ घुमा – मेरी जी-स्पॉट को ढूंढ... वहाँ एक खुरदुरा सा हिस्सा होता है... हाँ... वहीं... अब उसे दबा... और तेज़ कर..."

अमन तेज़ करता है – उसकी उँगली रूचि की चूत के अंदर आगे-पीछे होती है। रूचि जोर से कराहती है।

"हाँ... अब एक और उँगली डाल अमन... मुझे तेरे लंड के लिए तैयार होना है..."

अमन एक और उँगली डालता है – अब दो उँगलियाँ रूचि की चूत के अंदर आगे-पीछे हो रही हैं, और उसकी चूत से रस बह रहा है।

रूचि हाँफती है – "बस अमन... अब बहुत हो गया... तुझे सिखाने के लिए बस इतना ही काफी है... अब तू अपनी लुंगी उतार... और अपना लंड दिखा..."

अमन ने अपनी लुंगी खोली, और उसका जवान, तना हुआ, मोटा लंड बाहर आया – नसें उभरी हुई थीं, टिप पर पारदर्शी बूंद थी। रूचि की नज़र उस पर जम गई, और उसके होठों पर एक शैतानी मुस्कान आ गई।

"बाप रे अमन... इतना बड़ा... और मोटा... और तना हुआ... तेरा भाई विक्रम तो इसका आधा भी नहीं है..."

रूचि ने अपने हाथ से अमन के लंड को पकड़ा, और धीरे-धीरे उसे ऊपर-नीचे करने लगी।

"यह तो बहुत अच्छा है... एकदम परफेक्ट..."

"रूचि भाभी... आपके हाथ में... बहुत अच्छा लग रहा है..."

"अब पहली चीज़ अमन – तू अपना लंड कैसे चलाता है जब अकेला होता है? मुझे दिखा..."

अमन शरमाते हुए, धीरे-धीरे अपना लंड हाथ से ऊपर-नीचे करने लगा।

रूचि ने उसका हाथ पकड़कर सही तरीका सिखाया – "नहीं अमन, ऐसे नहीं... देख, पहले तेल लगा... थोड़ा सा... और फिर धीरे-धीरे... हाँ, टिप पर ध्यान दे... वहाँ सबसे ज्यादा संवेदनशीलता होती है... अब तेज़ कर... मुझे दिखा कि तू कितनी देर कर सकता है..."

अमन तेज़ करता है – उसका लंड और कड़ा हो जाता है, टिप पर बूंदें आ जाती हैं।

"बहुत अच्छा अमन... अब बस... अब मुझे दिखा कि तू कितना अच्छा चूस सकता है... मेरी चूत को चाट... मुझे बिस्तर पर लिटा... और मेरी चूत को अपनी जीभ से प्यार कर..."

अमन ने रूचि को बिस्तर पर लिटाया – रूचि की जांघें खुली, उसकी चूत पूरी तरह सामने, गीली, भरी हुई, और तैयार। अमन घुटनों के बल बैठा, और रूचि के चूत के बीच अपना मुँह ले गया – वहाँ से रस की गंध आ रही थी।

"रूचि भाभी... यहाँ से बहुत तेज़ गंध आ रही है... और गीला है..."

"यही तो औरत की असली खुशबू है अमन – इसे प्यार कर, चाट... अपनी जीभ से... पहले मेरी चूत की लिप्स को... ऊपर से नीचे... और फिर मेरी क्लिटोरिस को... बहुत हल्का..."

अमन अपनी जीभ से रूचि की चूत की लिप्स को ऊपर से नीचे चाटता है – वह गर्म, कोमल, और गीली है।

"हाँ... बहुत अच्छा अमन... अब अपनी जीभ को अन्दर ले... मेरी चूत के अंदर... और आगे-पीछे कर... जैसे लंड कर रहा हो..."

अमन अपनी जीभ रूचि की चूत के अंदर घुसाता है, और आगे-पीछे करता है।

"हाँ... हाँ... अमन... अब मेरी क्लिटोरिस को चूस... अपने होठों में ले... और हल्का सा दबा..."

अमन रूचि की क्लिटोरिस को अपने होठों में लेता है और हल्का-हल्का चूसता है। रूचि का शरीर काँपने लगता है।

"मैं... मैं खत्म होने वाली हूँ अमन... मत रुक... और चूस... और चाट... और अपनी उँगली अन्दर डाल..."

अमन अपनी उँगली रूचि की चूत के अंदर डालता है, और उसकी क्लिटोरिस को चूसता रहता है। रूचि चीखती हुई अपनी चरम सीमा पर पहुँचती है – उसकी चूत से रस की धार बह निकलती है।

"आह... आह... हाँ... मैं... मैं... छोड़ रही हूँ..."

अमन ने ऊपर देखा – "रूचि भाभी... ये तो... बहुत मीठा है..."

रूचि हाँफती है – "हाँ अमन... यही तो औरत का रस है... अब तू सीख गया कि कैसे चूत को खुश करना है... अब मुझे ऊपर आने दे... तुझे दिखाना है कि लंड को कैसे चूसा जाता है..."

रूचि उठी, और उसने अमन को बिस्तर पर लिटा दिया – अमन का लंड हवा में खड़ा था, तना हुआ, टिप पर उसका तरल। रूचि उसके ऊपर झुकी।

"अब देख अमन – जब कोई लड़की तेरा लंड चूस रही होती है, तो सबसे पहले वह उसे गीला करती है – अपनी जीभ से टिप को चाटती है... और फिर धीरे-धीरे पूरे को मुँह में लेती है..."

रूचि अपनी जीभ से अमन के लंड की टिप को चाटती है – उस पर मौजूद पारदर्शी बूंद को अपनी जीभ पर लेती है – और फिर धीरे-धीरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेती है।

"रूचि भाभी... बहुत अच्छा लग रहा है..."

रूचि अपने सिर को आगे-पीछे करती है, अमन के लंड को चूसती है, उसकी जीभ नसों पर घूमती है।

फिर उसने लंड को मुँह से निकाला – "अब तू मेरे ऊपर आ अमन... मुझे चोद... बिल्कुल वैसे जैसे मैंने सिखाया..."

अमन रूचि के ऊपर चढ़ा – रूचि की जांघें खुली, उसकी चूत तैयार – और अमन अपना लंड रूचि की चूत के दरवाज़े पर रखता है।

"अब अपना लंड अमन... मेरी चूत के दरवाज़े पर रख... पहले टिप... और धीरे-धीरे दबा..."

अमन अपना लंड रूचि की चूत के दरवाज़े पर रखता है, और धीरे-धीरे दबाता है – वह गर्म, गीली दीवारों को महसूस करता है।

"रूचि भाभी... बहुत गर्म है... और गीला..."

"हाँ... अब रुक अमन... मुझे एडजस्ट करने दे..."

कुछ सेकंड का सन्नाटा। रूचि गहरी-गहरी साँसें ले रही है।

"अब धीरे-धीरे और अंदर अमन... थोड़ा-थोड़ा... और मुझे महसूस कर... कैसे मेरी चूत तुझे निगल रही है..."

अमन धीरे-धीरे और अंदर घुसाता है – पूरा लंड अब आधा अंदर है।

"रूचि भाभी... बहुत तंग है... और गर्म..."

"हाँ... अब पूरा कर अमन... पूरा लंड अंदर... एक धक्के में..."

अमन एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लंड रूचि की चूत के अंदर घुसा देता है। रूचि चीख उठती है।

"आह... हाँ अमन... पूरा... अब रुक... मुझे साँस लेने दे..."

रूचि कुछ सेकंड रुकती है, गहरी साँसें लेती है।

"अब धीरे-धीरे आगे-पीछे कर अमन... धीरे..."

अमन धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू करता है – उसका लंड रूचि की गीली चूत के अंदर घुसता और निकलता है।

"हाँ... बहुत अच्छा अमन... अब अपनी गति बना... दो धक्के धीरे, एक तेज़... और फिर से... हाँ... अब अपने हाथों से मेरे मम्मों को दबा... और चूस... और नीचे चोदता रह..."

अमन दो धक्के धीरे, एक तेज़ – अपनी लय बनाता है – और वह रूचि के मम्मों को चूसते हुए चोदता रहता है।

"हाँ... अमन... बहुत अच्छा... अब अपनी कमर को घुमा... चोदते हुए... मेरी चूत के अंदर अपना लंड घुमा... हाँ... बिल्कुल ऐसे... अब गहरा कर... पूरा लंड बाहर निकाल... और फिर पूरा अंदर..."

अमन पूरा लंड बाहर निकालता है – उसका लंड रूचि के रस से चमक रहा है – और फिर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर घुसा देता है। रूचि चीखती है।

"आह... हाँ... बहुत अच्छा अमन... अब और तेज़ कर... लेकिन गहराई वही रख... मेरी साँसों को सुन..."

अमन तेज़ करता है – उसके धक्के अब कठोर, गहरे, और तेज़ हैं – उसकी जाँघें रूचि के चूतड़ों से टकरा रही हैं।

"हाँ... हाँ... अमन... मैं अब खत्म होने वाली हूँ... मेरी चूत तुझे और कसकर पकड़ रही है... तू भी मेरे साथ आ... और अपना वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़... अंदर..."

रूचि का शरीर कस जाता है – उसकी चूत अमन के लंड को जोर से दबाती है – बार-बार ऐंठन होती है। उसी क्षण, अमन का लंड जोर-जोर से धड़कता है और वह अपना वीर्य रूचि की चूत के अंदर छोड़ देता है।

"रूचि भाभी... मैं... मैं... छोड़ रहा हूँ..."

"आह... हाँ... अमन... बहुत अच्छा..."

दोनों थककर, एक-दूसरे के ऊपर गिर जाते हैं। वे गहरी-गहरी साँसें ले रहे हैं।

"बहुत अच्छा अमन... तूने सीख लिया..."

उस रात के बाद, रूचि ने अमन को हर रात कुछ नया सिखाया...

अगली सुबह – रूचि किचन में चूल्हे पर दूध गरम कर रही थी। उसने ढीली नाइटी पहनी थी, जो उसके बड़े मम्मों को और उभार रही थी। अमन पीछे से आया।

"आजा अमन... मैं तुझे किचन में सिखाऊँगी... कि कैसे चूल्हे पर चोदा जाता है..."

अमन ने पीछे से उसे कमर से पकड़ा – "रूचि भाभी... आपने कल रात बहुत अच्छा सिखाया..."

रूचि पीछे मुड़ी, उसके होठों को चूमा – "अब मुझे उठा अमन... और इस चूल्हे पर ही चोद..."

अमन ने रूचि को उठाया और किचन के स्टाल पर लिटाया। उसने उसकी नाइटी उठाई, उसकी नंगी चूत को देखा – वह पहले से ही गीली थी। अमन ने अपना लंड निकाला और एक जोरदार धक्के के साथ उसके अंदर घुसा दिया।

"हाँ अमन... बिल्कुल ऐसे... अब चोद... और मुझे बताना कि कैसा लग रहा है..."

"बहुत अच्छा लग रहा है, रूचि भाभी... आपकी चूत बहुत गीली है... और गर्म..."

"अब अपनी एक उँगली मेरी गांड में डाल अमन... सिखाती हूँ कि डबल मज़ा कैसे लिया जाता है..."

अमन धीरे-धीरे अपनी उँगली रूचि की गांड में डालता है।

"आह... हाँ... बहुत अच्छा अमन... अब दोनों जगह चोद... मेरी चूत और मेरी गांड... एक साथ..."

अमन एक हाथ से रूचि की चूत में लंड और दूसरे हाथ की उँगली गांड में – दोनों जगह धक्के मारता है।

"हाँ... हाँ... अमन... मैं... मैं..."

और इस तरह, रूचि ने अमन को रसोई में भी चोदना सिखाया – कि कैसे एक औरत को एक साथ दो जगह मज़ा दिया जा सकता है।

आधी रात – वे दोनों नंगे, छत पर... चाँदनी रात थी, और बहुत कुछ सीखने को बाकी था। रूचि छत पर खड़ी थी – उसकी साड़ी उतर चुकी थी, वह पूरी नंगी थी, चाँदनी में उसका शरीर चमक रहा था।

"आज मैं तुझे दिखाऊँगी अमन कि कैसे चाँदनी में चोदा जाता है..."

अमन पीछे से आया, उसे कमर से पकड़ा – उसका लंड पूरी तरह खड़ा था।

"रूचि भाभी... आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं... चाँदनी में..."

रूचि पीछे हटी, रेलिंग पर झुक गई, अपने चूतड़ों को उसके सामने किया – "अब पीछे से चोद अमन... बिना हाथों के... बस अपनी कमर का इस्तेमाल कर..."

अमन ने अपना लंड पीछे से रूचि की चूत पर लगाया – वह गीली थी – और एक धक्के के साथ अंदर घुसा दिया।

"हाँ अमन... अब धीरे-धीरे... और बहुत गहरा... मुझे पूरा महसूस होने दे..."

अमन धीरे-धीरे, बहुत गहरा चोदता है – उसकी जाँघें रूचि के चूतड़ों से टकराती हैं।

"हाँ... अमन... बहुत अच्छा... अब तेज़ कर... और मुझे चीखने दे... कोई नहीं सुनेगा..."

अमन तेज़ करता है – उसके धक्के कठोर, गहरे, और तेज़ हैं – उसका लंड उसकी चूत में बाहर-अंदर हो रहा है।

"आह... हाँ... मैं खत्म हो रही हूँ अमन... तू भी आ... मेरे अंदर... गर्म वीर्य..."

अमन उसी समय स्खलित होता है – अपना वीर्य रूचि की चूत के अंदर छोड़ता है। दोनों एक साथ चरम पर पहुँचते हैं।

और इस तरह, रूचि ने अपने देवर अमन को न सिर्फ चोदना सिखाया – बल्कि एक औरत के शरीर की हर बारीकी, हर पोजीशन, हर रहस्य सिखाया। किचन से छत तक, बिस्तर से बाथरूम तक – हर जगह, हर अंदाज़ में। उस रात के बाद, अमन और कुछ नहीं, बल्कि एक जवान, अनुभवी प्रेमी बन गया था – हमेशा रूचि का शिष्य, हमेशा उसका दीवाना।

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