देहाती कामुक रोमांस · 3 episodes · 8:43 · Jul 24
कोठरी का रहस्य और सच्चाई का साम : भाग 3
kothri ki sacchai
Episode 3
Shanaya
दोस्तों, आपका स्वागत है अतिवासना की एक नई कहानी में। आज हम लेकर आए हैं 'कोठरी का रहस्य और सच्चाई का साम : भाग 3' - एक ऐसी कहानी जहाँ प्यार, धोखा और सच्चाई एक सा
दोस्तों, आपका स्वागत है अतिवासना की एक नई कहानी में। आज हम लेकर आए हैं 'कोठरी का रहस्य और सच्चाई का साम : भाग 3' - एक ऐसी कहानी जहाँ प्यार, धोखा और सच्चाई एक साथ उलझे हुए हैं। राज और रोहित के बीच दुर्गा के लिए यह जंग अब अपने चरम पर पहुँचने वाली है। क्या होगा जब रोहित, जो कोमा में था, अचानक होश में आ जाए? और क्या राज की योजना सच में दुर्गा की खुशी के लिए है? तो चलिए, शुरू करते हैं...
शादी से एक दिन पहले, राज को एक फोन आया - "आपका दोस्त रोहित, जो छह महीने से कोमा में था, होश में आ गया है।" राज अस्पताल गया, वहाँ रोहित बैठा था - कमज़ोर, पतला, लेकिन उसकी आँखों में पूरी ताकत थी। "राज! तुम! दुर्गा कहाँ है? मुझे उससे मिलना है!" राज ने रोहित का हाथ पकडा, "रोहित, मैं तुम्हें कुछ बताने वाला हूँ। दुर्गा ठीक है, वह देख सकती है, और वह कल मुझसे शादी करने वाली है।" रोहित चौंक गया, उसकी मुट्ठी भिंच गई, "तुम क्या कह रहे हो? मैं उससे प्यार करता हूँ!" राज ने कहा, "तुम छह महीने कोमा में थे, हम सबने सोचा तुम मर गए। दुर्गा ने बहुत दुख झेला, अब वह मुझसे खुश है। तुम उसकी खुशी क्यों खराब करना चाहते हो?" रोहित ने आँखें बंद कर लीं। राज सही कह रहा था। उसने राज से कहा, "ठीक है, मैं तुम्हारी शादी में नहीं आऊँगा। लेकिन अगर तुमने उसे दुखी किया, तो मैं जान से मार डालूँगा तुम्हें।" राज ने रोहित को गले लगाया, "तुम मेरे भाई हो, रोहित। मैं उसे कभी दुखी नहीं होने दूंगा।"
शादी के दिन, राज ने रोहित को अपने घर बुलाया - "तुम मेरे गवाह बनो, रोहित।" लेकिन उसने रोहित को कोठरी में बंद कर दिया, "शादी खत्म होने तक तुम बाहर नहीं आओगे, क्योंकि तुम्हारी एक नज़र सब बिगाड सकती है।" रोहित कोठरी में बैठा था - अंधेरा, तंग, और बदबूदार। उसने दरवाज़ा धकेला, लेकिन वह बंद था। वह निराश होकर कोने में बैठ गया, उसके मन में दुर्गा की तस्वीरें थीं - वह पहली रात, जब उसने उसे छुआ था, जब उसने उसका रस चूसा था, जब वह उसके अंदर गया था। उसके शरीर में गर्मी दौड गई, उसका लंड लुंगी के अंदर सीधा हो गया।
तभी बिजली चली गई, पूरा घर अंधेरे में डूब गया। रोहित ने फिर से दरवाज़ा धकेला - यह खुल गया। वह बाहर निकला, और दुल्हन के कमरे की तरफ बढा, क्योंकि उसे दुर्गा की आवाज़ सुनाई दे रही थी। कमरे में दुर्गा अकेली थी - लाल लहंगा, सोने की चोली, हाथों में मेहँदी, आँखों में काजल, और होठों पर लाल लिपस्टिक। उसके स्तन चोली से बाहर उभरे हुए थे, उसकी कमर खुली हुई थी, और उसने शादी की उत्तेजना में दो गिलास शराब पी ली थी। उसके गाल लाल थे, उसकी साँसें भारी थीं। रोहित धीरे-धीरे अंदर आया, उसकी आँखें दुर्गा के शरीर पर टिकी हुई थीं। दुर्गा ने अंधेरे में उसे महसूस किया, "कौन है? राज?" रोहित चुप था। दुर्गा उठी, उसके पास आई, और उसके शरीर को छुआ - उसके गाल, उसके होंठ, उसकी गर्दन। बिजली दौड गई, दुर्गा ने पहचान लिया, "तुम... रोहित? तुम ज़िंदा हो?" रोहित ने कहा, "चुप रहो, दुर्गा, कोई सुन लेगा।"
दुर्गा ने उसे गले से लगा लिया, उसके होंठ रोहित के होंठों पर आ गए - चुंबन गहरा, तीव्र, और दो साल की प्यास से भरा। दुर्गा का हाथ रोहित की लुंगी के अंदर गया, उसका लंड पहले से ही सीधा खडा था - मोटा, गर्म, और तैयार। रोहित ने दुर्गा का लहंगा ऊपर किया, और उसकी चूत को छुआ - वह पूरी तरह भीगी हुई थी, उसका रस उसकी जांघों पर बह रहा था। "तुम मुझसे शादी करोगी या नहीं, मुझे नहीं पता," रोहित ने कहा, "लेकिन इस पल मैं तुम्हें चाहता हूँ, दुर्गा।"
रोहित ने दुर्गा को बिस्तर पर लिटाया। इस बार उसने कोई जल्दी नहीं की - उसने पहले उसकी चोली खोली, उसके स्तन बाहर आए, और उसने उन्हें चूसा - धीरे-धीरे, एक-एक करके, निप्पल पर जीभ घुमाई, और दुर्गा कराह उठी। रोहित ने उसका लहंगा नीचे किया, उसकी पैंटी को एक तरफ किया, और अपना मुँह उसकी चूत पर रखा। उसकी जीभ ने उसकी चूत को चाटा, उसका रस चूसा, और फिर अंदर गहराई तक गई। दुर्गा ने अपनी टाँगें फैला लीं, "हाँ... वही... बिल्कुल वैसे ही... जैसे पहले..." रोहित ने अपनी जीभ और अंदर डाली, उसके रस को पिया, और फिर ऊपर आया। उसने अपनी लुंगी पूरी तरह उतार दी, और उसका लंड सामने था - पूरी तरह कडा, सिरा लाल, और उस पर दुर्गा के रस की चमक थी। उसने दुर्गा को पलटा, उसके नितंबों पर हाथ रखा, और धीरे-धीरे उसकी चूत में अपना लंड डाला। दुर्गा ने उसे अंदर महसूस किया - गहरा, गर्म, और पूरी तरह भरने वाला। रोहित ने धीरे-धीरे धक्के मारे - पहले आहिस्ता, फिर तेज़। दुर्गा के नितंब उछल रहे थे, उसके स्तन बिस्तर पर रगड खा रहे थे, और वह चिल्ला रही थी, "और... और तेज़... रोहित... मुझे मत छोडना..." रोहित ने पूरी ताकत से धक्के मारे, उसकी जांघें दुर्गा के नितंबों पर टकरा रही थीं, कमरे में थप-थप की आवाज़ गूँज रही थी। फिर दोनों चरम पर पहुँचे - दुर्गा की चूत ने रोहित के लंड को कसकर दबोचा, और रोहित का गर्म वीर्य उसके अंदर गहराई तक भर गया। दोनों उसी स्थिति में रुके रहे - शरीर एक-दूसरे से चिपके, साँसें एक हो गईं। दुर्गा ने आँसू बहाते हुए कहा, "रोहित... मैं राज से शादी नहीं कर सकती। मेरा दिल सिर्फ तुम्हारा है, हमेशा तुम्हारा था, और हमेशा तुम्हारा रहेगा।"
शादी के मंडप में राज खडा था - शेरवानी में, सोने का मुकुट, और चेहरे पर मुस्कान। दुल्हन आई - दुर्गा, लाल लहंगे में। राज ने पूछा, "क्या बात है? तुम ऐसी क्यों लग रही हो?" दुर्गा ने अपना घूँघट उठाया - उसकी आँखें लाल थीं, उसके गाल पर आँसू बह रहे थे। उसने राज का हाथ पकडा, और सबके सामने कहा, "राज... मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती। मेरा प्यार रोहित है... वह ज़िंदा है... और मैं उसके बिना नहीं रह सकती।" भीड में हंगामा हो गया - लोग चिल्लाने लगे। तभी रोहित भीड से बाहर आया। राज के चेहरे पर पहले गुस्सा था, फिर दर्द, और फिर एक अजीब सी मुस्कान। उसने माइक उठाया, "सुनो सब! यह सब मेरा प्लान था। मुझे पता था कि रोहित ज़िंदा है। मैं जानता था कि वह आज आएगा। मैं जानबूझकर रोहित को कोठरी में बंद किया, और मैं जानता था कि वह बाहर निकलेगा। यह उनकी कहानी है, मैं सिर्फ एक साक्षी हूँ।" दुर्गा ने राज की तरफ देखा, आँखों में आँसू थे, "तुमने यह सब मेरे लिए किया?" राज ने कहा, "मैं तुमसे प्यार करता था, दुर्गा। लेकिन मैं तुम्हारी खुशी चाहता था। अब जाओ, रोहित के साथ, और खुश रहो।"
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Episodes
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