चुदाई की कहानी · 3 episodes · 14:52 · Jul 23
प्रकरण 3: स्वैप पूरा – चारों का सेक्स, सबका मज़ा
Episode 3
Saavi
दोस्तों, आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी कहानी जहाँ चार लोगों के बीच का खेल पूरा होता है और सबको अपना-अपना मज़ा मिलता है। यह कहानी है स्वैप के उस सफर की जो पि
दोस्तों, आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी कहानी जहाँ चार लोगों के बीच का खेल पूरा होता है और सबको अपना-अपना मज़ा मिलता है। यह कहानी है स्वैप के उस सफर की जो पिछले भाग में शुरू हुआ था, और अब इस आखिरी भाग में सब कुछ बदल जाता है। तो चलिए, शुरू करते हैं...
वह निढाल होकर मुझ पर गिर पडा – यार कुछ तो बोल, मेरी गांड पसीने में भीग गई पर समझ नहीं आ रहा कि तू आज इतनी चुप क्यों है? मैं कुछ कहती, इतने में बिजली भी आ गई और मेरा पति मनोज चौंक पडा। उसने देखा कि उसका लंड मेरी चूत में नहीं, सपना की चूत में घुसा हुआ था। उसका लंड सिकुड के एकदम सपना की चूत से बाहर आ गया। उसके चेहरे पर बहुत बडा प्रश्न चिन्ह दिख रहा था और सपना के चेहरे पर एक तृप्ति और शरारत भरी मीठी मुस्कान थी।
अब आगे की कहानी सपना के शब्दों में।
मनोज बोला – यार सपना, यह सब हुआ कैसे? तू यहां कैसे आ गई? रवि और मधु कहां हैं? इतना बडा परिवर्तन कैसे हो गया? केवल १५ दिन के लिए मैं बाहर क्या गया, तुम दोनों ने मिलकर मेरे को इतना बडा सरप्राइज दे दिया? मैं बोली – मैं आई तुमसे चुदवाने और मधु गई मेरे पति रवि से चुदने। मनोज अभी भी जो घट चुका था और जो अब आगे घटने वाला था उसको लेकर बहुत रोमांचित था। पर अब उसकी हैरानी कम होती जा रही थी।
मैंने सारी बात उसको डिटेल में समझाई कि कैसे पहले मधु अपनी वासना की आग बुझाने मेरे पति रवि से चुदवाने गई, फिर कैसे हमारे बीच लेस्बियन सैक्स हुआ और कैसे उसने मुझे तुम्हारे साथ चुदाई का मजा लेने के लिए उकसाया। फिर कैसे मैंने मधु की योजना के अनुसार रवि को मधु की चुदाई करते हुए पकडा।
मैंने आगे बताया – अरे यार, मैं तो पहले से ही तुम्हारे जैसे किसी रसिक और जवान गैर मर्द का लंड लेने के लिए तरस रही थी। पर मुझे यह पता नहीं था कि मधु मुझे तुमसे चुदवाने के लिए तैयार कर रही है। इसलिए जब मधु ने मुझे यह पूछा कि तुझे अंकल जी कैसे लगते हैं तो मैंने यही कहा कि अच्छे लगते हैं। लेकिन मुझे जब उसके इरादे का पता चला तो मैं पहले तो थोडा झिझकी लेकिन फिर मुझे लगा यह तो ऐसा प्रस्ताव है जैसे किसी भूखे को छप्पन भोग मिल जाएं तो मैं कैसे मना करती। और अब देख लो तुम्हारे सामने कैसे नंगी बिछी हुई पडी हूं।
मनोज मेरी बातों से रिलैक्स हुआ, वह फिर से चुदाई के मूड में आ रहा था कि अब अनायास मिली मेरी नई चूत का भरपूर मजा लिया जाए। फिर जैसा कि हमेशा होता है, हर मर्द एक बार औरत की चूत चोदने के बाद गांड मारने की इच्छा करने लगता है। तो मनोज ने बोला – यार सपना, जिन बूब्स को मैं ठीक से देखने के लिए तरसता था आज वे मेरे सामने हैं, मेरे हाथों में हैं। इसलिए ऐसा लगता है कि तेरी जिस मटकती गांड को देख के मेरे दिल में हलचल होती थी, मेरा लंड तन्नाने लगता था, आज तो मेरा तेरी उसी मटकती हुई सुडौल गांड मारने का सपना भी पूरा होने वाला है। अब तो मैं तेरी गांड मारूंगा।
मैंने उसे कहा – मार लेना यार, मार लेना, कहीं भागी नहीं जा रही हूं! मुझे तुम्हारा लंड इतना पसंद आया है कि अब तो तुम जब बोलोगे मैं तुम्हारे लंड की सेवा में हाजिर हो जाऊंगी। लेकिन पहले मेरी चूत एक बार और अच्छे से चोद दो यार, बहुत भूखी है मेरी चूत लंड के रगडों के लिए। उसके बाद मनोज और मैं दोनों उठे और अपनी चूत और लंड अच्छे से धो कर के वापस आए। उसके बाद शुरू हुआ कामुकता का एक और मस्ती तथा आनन्द का नशीला दौर।
पहले तो मैंने मनोज का लंड चूसना शुरू किया जो एकदम धुला हुआ तरोताजा नर्म पडा हुआ था। एक पराई औरत यदि मर्द का लंड चूसे तो उसके लिए इससे ज्यादा आनन्द की कोई बात नहीं हो सकती। धीरे धीरे उसके लंड में जान आई, वह सेमी इरेक्ट कंडीशन में आया, इस कंडीशन में मुझे लंड चूसने में बहुत मजा आता है। उस पर आज तो मेरे मुंह में मुझे जन्नत की सैर कराने वाला मेरा मनपसंद एक गैर मर्द का मांसल लंड था, ऐसी इच्छा हो रही थी ये घडियां कभी खत्म ना हों। फिर जब मनोज का लंड थोडा कडक हो गया तो उसने भी मेरी चूत चाटना शुरू की। मेरी चूत के लिए तो गैर मर्द द्वारा ओरल का नया अनुभव था, वो लगी पानी छोडने! नई चूत आखिर नई होती है, इसलिए मनोज भी मेरी चूतरस के चटखारे ले रहा था।
उसके बाद हम दोनों ६९ की पोजीशन में आए। पहले मैं उसके ऊपर थी, ऐसी स्थिति में लंड चूसना सबसे ज्यादा आरामदेह होता है। फिर वह मेरे ऊपर आया, इस पोजीशन में उसके लंड को ज्यादा तनाव मिल रहा था। दोनों ने १०-१५ मिनट तक ओरल सैक्स का मजा लिया।
फिर जब मुझसे रहा नहीं गया, मेरे शरीर में मर्द के शरीर के नीचे दबने की इच्छा उठने लगी और मेरी चूत मनोज के लंड के लिए मचलने लगी तो मैंने उसे कहा – अरे यार, अब जरा कस के चोद दो इस निगोडी चूत को जो तुम्हारे लंड के रगडों के लिए तडप रही है। मनोज का लंड तो तैयार था ही मेरी चूत में घुसने को!
इस बार मनोज ने पूरा वजन मेरे ऊपर डाल दिया और फिर पीछे से गांड उठाकर अपना कडक लंड मेरी चूत के ऊपर टिका के एक जोर का झटका दिया। लंड और चूत हम दोनों की मुखलार से तरबतर चिकने थे इसलिए लंड फिसलता हुआ जड तक अंदर चला गया। उसके बाद उसने अपने आप को लंबी रेस के लिए तैयार किया और हौले हौले धक्के लगाना शुरू किया। ऐसे ही धक्के मेरी चाहत थी, ऐसे ही धक्कों में राहत थी। हर धक्का मुझे जन्नत की सैर करा रहा था। थोडी देर तक धीरे-धीरे चुदने के बाद मेरी चूत मुझसे कहने लगी कि अब मेरे को जोरों के रगडे चाहिए, जोरों के रगडे।
मैंने मनोज से कहा – अब कस के रगड दो मेरी चूत को मेरे जालिम राजा, कस के रगड दो। उसने कहा – ले भोसडी वाली, आज तेरी चूत को वो आनन्द दूंगा कि तू भी याद करेगी कि कोई मर्द मिला था चोदने वाला। मनोज एक बार झड चुका था इसलिए इस बार उसे पर्याप्त समय लगना था झडने में!
करीब १० मिनट की लगातार भीषण चुदाई के बाद मेरी चूत में जैसे भूकंप सा आया, मेरी आंखें बंद हो गईं, सांसें फूल गई और चूत के फडकने में इतना आनन्द मिल रहा था कि मैं सारी दुनिया भूल चुकी थी। मनोज भी अपने लंड में उठ रहे मस्ती के ज्वार भाटे में सिर से पैर तक भीग चुका था। फिर मेरी चूत की आग मनोज के लंड से निकले वीर्य के कतरों से ठंडी होने लगी। मेरा जिस्म निढाल होने लगा और मनोज भी पसीने में लथपथ होकर मेरे ऊपर गिर पडा और ५ मिनट तक मैं उसके वजन का आनन्द लेती रही।
सच पूछो तो औरत के लिए किसी जवां मर्द के नीचे दबे रहने का सुख बहुत बडा सुख है, मर्द के नीचे दब कर उसकी सारी थकान, सारी असुरक्षा की भावना, सारा तनाव सब समाप्त हो जाता है। उस समय उसे ऐसा एहसास होता है कि सुकून के ये पल कभी खत्म ना हों। उसके बाद हम दोनों गहरी मीठी नींद में एक दूसरे से लिपट के सो गए। पर सोने से पहले मनोज ये कहना न भूला – सुबह उठते ही सबसे पहले तेरी गांड मारूंगा। उससे तेरा पेट भी बढिया साफ हो जाएगा। तभी मैंने तय कर लिया कि मेरी गांड जो अब तक एकदम कुंआरी थी उसे सुबह मनोज के हवाले करूंगी। मैंने कभी रवि को अपनी गांड में लंड तो ठीक है, उंगली भी डालने नहीं दी थी। मेरा रोम-रोम खिल रहा था कि आज मेरी कुंआरी गांड का उदघाटन होगा, पहली बार मनोज का लंबा और मोटा लंड उसमें प्रवेश करेगा। मेरी गांड फट भी सकती है पर अब तो मैं गांड मराने की ठान चुकी थी, जो होगा देखा जाएगा।
सुबह मनोज ने मुझे घोडी बनाया। अब गांड का गहरा भूरा सुहाना छेद उसके सामने था। वह घुटने के बल बैठा और मेरी गांड को अपनी जुबान से कुरेदने लगा। मेरी गांड में बहुत अधिक गुदगुदी हो रही थी। उसके बाद उसने अपनी एक उंगली तेल के अंदर भीगो के गांड में डाली। गांड उंगली का स्पर्श पाकर पहले तो थोडी सिकुडी, उसके बाद फैली तो उसने अच्छे से भीतर तक तेल लगाया। अब गांड एक हद तक लंड लेने को तैयार हो चुकी थी।
उसके बाद उसने अपने लंड को भी अच्छे से चिकना कर लिया। मुझे चित लिटाया, मेरी दोनों टांगें उठाकर उसने घुटनों से मोडकर मेरे स्तनों के ऊपर टिका दी, अपने लंड का अच्छा खासा मोटा सुपारा मेरी गांड की अंजीर के बीचोबीच रख के बहुत हौले से लेकिन दम लगा के उसने लंड को गांड के भीतर प्रवेश करवाया। पहली बार किसी मर्द का लंड मेरी गांड में घुसा था। मेरी गांड के पूरे छल्ले पर थोडी चिरमिराहट, कुछ जलन सी हुई। पर एक तो गांड अच्छी चिकनी थी और सबसे बडी बात मैं अपनी इच्छा से गांड मरवा रही थी। जब औरत इच्छा से अपनी गांड मरवाती है तो हर दर्द सहन हो जाता है। उसका सुपारा अंदर घुस चुका था। अब उसके बाद पूरा लंड घुसने में कोई विशेष परेशानी नहीं थी। उसने बहुत धीरे-धीरे अपने लंड को आगे बढाया। मैंने भी बाहर की ओर दम लगाया जिससे लंड को गांड में घुसाने में थोडी मदद मिल सके।
अभी लंड पूरा घुसा भी नहीं था कि मधु और रवि दोनों कमरे में आ गए। रवि मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था और मैं उसको देखकर झेंप रही थी। तब रवि बोला – अच्छा साली, मेरे को तो कभी गांड टच भी नहीं करने दी और मनोज से गांड मरवा रही है? मैंने उसे कहा – साले भोसडी के, तूने तो कभी ढंग से मेरे को चोदा भी नहीं, तो तुझे गांड कैसे मारने देती?
उसके बाद मधु और रवि दोनों ने मेरे स्तनों को दबाना और चूसना शुरु किया। मेरी मस्ती का कोई पारावार नहीं था, मुझे लग रहा था कि अरे यार कितने बरस बिना इस आनन्द के यूं ही गंवा दिए। मरने के बाद स्वर्ग तो पता नहीं कल्पना है या वास्तविकता, लेकिन असली जन्नत यहीं है, वासना के इस खेल में, अनमोल लेकिन मुफ्त। ऐसा चरम सुख जो दिल दिमाग को तनाव रहित कर मस्ती से भर देता है।
फिर मधु मेरे मुंह के ऊपर बैठ गई, मैं उसकी चूत और उसकी गांड दोनों चाट रही थी। रवि खडा होकर मधु को अपना लंड चूसा रहा था। मनोज ने झुक कर मधु के बोबे चूसने शुरू कर दिए। मेरी जिंदगी ने एक नया किंतु अनोखा मोड ले लिया था, अब मुझे रवि भी इसलिए अच्छा लगने लगा था क्योंकि उसने मेरे को खुलकर जिंदगी के मजे लेने को आजाद कर दिया था।
मनोज को गांड मारते हुए १० मिनट हो गए थे। अब उसके लंड में फिर से तूफान उठ रहा था फिर भी उसने बहुत जेंटल तरीके से धक्के लगाए और मेरी गांड की बहुत गहराई में अपने वीर्य की पिचकारी छोडी। और जब तक लंड सिकुड नहीं गया तब तक मनोज गांड में लंड को दबाए स्खलन के उन पलों का आनन्द लेता रहा। उसके बाद अब यह कहने की तो शायद जरूरत भी नहीं है कि हमारे बीच में आज भी स्वैपिंग, थ्रीसम, फोरसम, सब निर्बाध रूप से चल रहा है।
ऐसी और कहानियाँ सुनने के लिए अतिवासना ऐप से जुडे रहें। फिर मिलेंगे।
Episodes

दोस्तों, आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं एक ऐसी कहानी जहाँ वासना की शुरुआत होती है एक भाभी के पहले कदम से। यह कहानी है एक ऐसी औरत की जो अपने पति की अनुपस्थिति में

दोस्तों, आज की कहानी में हम एक ऐसी रात की बात करेंगे, जहाँ दो औरतों के बीच की वासना और खेल ने सब कुछ बदल दिया। सपना की सोई हुई इच्छाओं को जगाने का यह सफर आपको र

दोस्तों, आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसी कहानी जहाँ चार लोगों के बीच का खेल पूरा होता है और सबको अपना-अपना मज़ा मिलता है। यह कहानी है स्वैप के उस सफर की जो पि