3 episodes · 14:50 · Jul 23

भाग १ – कमसिन बदन का मज़ा

Episode 1

Rakshit

दोस्तों, यह कहानी दो भागों में है। पहले भाग में आप जानेंगे कि कैसे मेरी नज़र अपनी मौसी की जवान बेटी पर पड़ी, और कैसे हम दोनों के बीच धीरे-धीरे करीबी बढ़ी। दूसरे

दोस्तों, यह कहानी तीन भागों में है।

पहले भाग में आप जानेंगे कि कैसे मेरी नज़र अपनी मौसी की जवान बेटी पर पड़ी, और कैसे हम दोनों के बीच धीरे-धीरे करीबी बढ़ी।

दूसरे भाग में वह पूरी चुदाई की दास्तान है – जिसमें उसकी कुंवारी चूत की सील तोड़ी गई, और बाद में गांड का भी रास्ता खोला गया।

तीसरे भाग में आप सुनेंगे कि कैसे मैंने उसकी माँ – यानी अपनी मौसी – को भी चोदा, और कैसे उस अनुभव ने मेरी जिंदगी की सबसे गरमागरम यादों में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

तो चलिए, शुरू करते हैं पहला भाग…

मैंने बहुत सी चूतों की आग बुझाई है और उनका रस भी पिया है।

पर इस बार की चुदाई ने मुझे मजबूर कर दिया कि मैं इस अपनी सेक्स कहानी को आप सभी के साथ साझा करूँ।

हुआ यूँ कि मेरे पड़ोस में मेरी मौसी रहने के लिए आईं।

मैं बहुत जल्दी उन लोगों से घुल-मिल गया।

अब मैं ज्यादा से ज्यादा टाइम उनके घर पर बिताने लगा।

मेरी मौसी की उम्र कोई ज्यादा नहीं थी, वे ३९-४० साल की रही होंगी।

उनका रंग एकदम दूध सा गोरा, चेहरा क्यूट सा, पतली सी कमर… और चूचियाँ तो ऐसी कि पूछो ही मत।

उनकी चूचियों का रंग भी उनके जैसे बिल्कुल सफेद था।

वे जब भी झुकतीं, तो मेरे अंदर करेंट दौड़ जाता था।

उनकी उभरी हुई गांड का तो कहना ही क्या था!

मतलब कहने का यह कि जो भी एक बार उन्हें देख ले, तो वह मुठ मारने पर मजबूर हो जाए।

चोदा तो मैंने उन्हें भी है।

पर वह सेक्स कहानी मैं आपको कभी और बताऊँगा।

पहले उनकी बेटी की चुदाई के बारे में बता देता हूँ।

उनकी बेटी परी (यह नाम बदला हुआ है) की उम्र तब १८ की हो गई थी और वह गदर माल हो गई थी।

उसका रंग पूरा सफेद, लाल-लाल गाल, छोटी-छोटी सी चीकू के जैसी गोल-गोल चूचियाँ, जो पूरे हाथ में समा जाएँ।

पतली कमर से नीचे एकदम गोल मासूम सी गांड।

वह मेरे ख्यालों में आने लगी थी।

ऐसे तो मैं चोदू किस्म का बंदा हूँ तो हर औरत-लड़की को चुदाई की नज़र से ही देखता हूँ।

पर शुरू-शुरू में उसको लेकर मेरा ऐसा कुछ इरादा नहीं था।

हम दोनों साथ में मस्ती करते थे, मैं उसके साथ क्रिकेट खेलता था।

जब मैं अपनी एक्सरसाइज़ करता था तो वह मेरे पास आकर बैठ जाती और मुझे देखती रहती थी।

उसे मेरे साथ रहने में मज़ा आता था।

क्योंकि मेरा नेचर भी कुछ ऐसा ही है कि मैं हमेशा खुश रहता हूँ और हँसी-मज़ाक करके सबको हँसाता रहता हूँ।

वह मेरे साथ बहुत घुल-मिल गई थी।

अब मेरी नज़रें उस पर हावी होने लगी थीं और मैं उसकी कुंवारी चूत को चोदना चाहता था।

एक दिन मैंने उसके आने से पहले ही मोबाइल में पॉर्न मूवी लगा दी और एक्सरसाइज़ करने लगा।

वह आई तो मैं अपना मोबाइल वहीं छोड़ कर जानबूझ कर पानी पीने के बहाने किचन में चला गया ताकि वह सेक्स वीडियो देख ले।

मैं थोड़ी देर तक जानबूझ कर नहीं आया।

फिर जब मैं आया तो मोबाइल लॉक था।

मैं समझ गया कि उसने वीडियो देख कर लॉक कर दिया है।

अब वह मेरे मूड को समझ चुकी थी और मैं उसकी नज़रों को पढ़ने लगा था कि यह मेरे लंड को बड़ी गौर से क्यों देखती है।

एक दिन मैंने उससे पूछा – परी, एक बात बोलूँ?

वह बोली – हाँ भैया बोलिए!

मैंने कहा – किसी से बोलोगी तो नहीं?

उसने कहा – नहीं!

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा – पहले प्रॉमिस करो!

वह हँस कर बोली – प्रॉमिस!

फिर मैंने कई बार प्रॉमिस करवाते-करवाते उसे पीछे से पकड़ लिया।

मेरे दोनों हाथ उसके पेट पर आ गए थे और मेरा लंड जो कि खड़ा हो चुका था, उसकी कमसिन गांड से टच हो रहा था।

मैं धीरे-धीरे अपना लंड उसकी कमसिन गांड में धकेल रहा था।

उसे उस वक्त चुदाई के बारे में कुछ भी नहीं समझ आ रहा था।

बातों-बातों में मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया।

ऊहह… क्या सॉफ्ट सी छोटी-छोटी चूचियाँ थीं।

मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को दबाने और सहलाने लगा।

अब उसे भी मज़ा आ रहा था, तो वह भी अपनी चूचियाँ मिंजवाती रही।

करीब दस मिनट तक मैंने उसकी चूचियाँ दबाईं और वह मस्त हो गई।

वह बोली – भैया आप कुछ कहने वाले थे?

मैंने कहा – कुछ कहने का जी नहीं कर रहा है।

वह बोली – क्यों?

मैंने उसके एक निप्पल को मींजते हुए कहा – बस ऐसे ही… आज मज़ा आ रहा है, तो कुछ कहने का मन ही नहीं कर रहा है।

वह हँस दी।

अब हम दोनों समझ चुके थे कि बात-वात कुछ नहीं थी, बस चूचियों को दबाने की नीयत थी।

उसे अच्छा लगा।

अगली बार वह खुद से मेरी गोदी में आकर बैठ गई और मैं उसकी चूचियाँ मसलने लगा।

नीचे से मेरा लंड उसकी चूत में गड़ रहा था, जिसे वह अपनी गांड हिलाकर और ज्यादा घिसवा रही थी।

हम दोनों ही इस खेल को हरी झंडी दे चुके थे।

अब जब भी उसे मौका मिलता, वह मेरे घर आ जाती और मैं उसे कभी अपनी गोद में बैठा कर तो कभी खड़े-खड़े उसकी चूचियों को खूब मसल कर मज़ा ले लेता।

ऐसा कई दिनों तक चलता रहा।

हम दोनों को चुदाई करने का मौका नहीं मिल पा रहा था।

जबकि अब मैं जब भी मौका मिलता, तो उसके कोमल गुलाबी होंठों को चूम लेता। उसे लेटा कर उसके ऊपर आकर उसकी चूचियों को खूब चूसता… उसके एक दूध को अपने मुँह में पूरा भर-भर कर चूसता, जिससे वह मदहोश हो जाती।

एक दिन उसके घर में कोई नहीं था।

उसका इंस्टा पर मैसेज आया कि – भैया आज मौका है, मॉम-डैड कहीं जा रहे हैं, वे दोनों २-३ घंटों के लिए जा रहे हैं। आप आ जाओ।

मैं बेताब हो उठा था उसकी कुंवारी चूत को चाटने के लिए और उसकी वर्जिनिटी खत्म करने के लिए।

मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो गया था।

जैसे ही उसके मॉम-डैड यानि मेरे मौसा-मौसी गए, मैं उसके घर आ गया।

मैंने उसे बाँहों में भर लिया और उसके गुलाबी होंठों को चूसने लगा।

पीछे से उसकी गांड को दोनों हाथों से सहलाने और दबाने लगा।

फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसे चूसने लगा।

कभी उसके होंठ, कभी गर्दन, कभी उसकी कमसिन छोटी-छोटी चूचियाँ और कभी उसके पेट पर गोल गहरी नाभि को चूसने लगता।

मेरा खड़ा लंड उसकी कुंवारी चूत पर रगड़ मार रहा था।

मैंने उसकी पैंट खोलना शुरू किया, उसने मना कर दिया – हाय भैया… अभी यह नहीं!

तो मैंने कहा – क्यों नहीं, बहुत मज़ा आएगा… लेकर तो देख!

उसने बहुत मना किया।

पर मैंने उसे राजी कर लिया और उसकी पैंट खोल दी।

मगर उसने अपनी पैंटी नहीं उतारने दी।

मैंने अपना लंड निकाला और उसकी छोटी सी चूत की दरार में रगड़ना शुरू कर दिया था।

उसकी फूली हुई चूत की दरार उसकी टाइट पैंटी के ऊपर से ही दिख रही थी।

उसको लगा कि मैं उसे चूसते हुए उसकी चूत पर रगड़ने का मज़ा ले रहा हूँ।

चूँकि उसे भी लंड रगड़वाने में मज़ा आ रहा था तो वह भी बिंदास अपनी दोनों टाँगों को खोल कर मेरे लौड़े से अपनी बुर घिसवा रही थी।

फिर मैंने एक हाथ से उसकी पैंटी खिसका कर लंड को चूत से टच करवा दिया तो वह एकदम से सिहर उठी।

उसी पल उत्तेजना का सैलाब उठा और वह झड़ गई।

कुंवारी चूत की गर्मी को मैं भी सहन नहीं कर पाया और मैं भी उसकी बुर पर ही झड़ने को मचल गया।

मैंने भी अपना पानी उसकी पैंटी के किनारे से चूत पर गिरा दिया।

हम दोनों की साँसें बहुत तेज़-तेज़ चल रही थीं और मैं उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा।

फिर मेरी जीभ उसके मुँह में चली गई और हम दोनों वासना के दरिया में गोते लगाने लगे।

उस दिन मैं वहाँ से चला आया।

अब हम दोनों के बीच ऐसा ही बहुत दिन चलता रहा।

मैंने उससे कहा – अब तुम्हें मेरे सामने नंगी होना पड़ेगा और मुझसे अच्छे से चुदवाना पड़ेगा।

वह हँस कर बोली – हाँ ठीक है भैया… अबकी बार जब घर में कोई नहीं रहेगा और चुदाई के लिए अच्छा मौका रहेगा, तब अपने मन की सब कर लेना।

एक दिन मेरे घर के सब लोग मंदिर गए थे।

यह मंदिर एक गाँव में था और मेरे घर से करीब ४० किलोमीटर दूर था।

उधर सारा दिन कार्यक्रम चलने वाला था। मौसा-मौसी को भी साथ में जाना था।

परी ने जाने से मना कर दिया था तो उसकी देखरेख के लिए मुझे भी घर में रुकने के लिए कह दिया गया था।

मतलब बिल्ली से दूध की रखवाली के लिए कहा गया था और मुझे रह-रह कर बस यह लग रहा था कि कब सब लोग जाएँ और मैं परी की कुंवारी चूत फाड़ दूँ।

मैंने उसे अपने घर बुलाया।

आते ही वह मेरे साथ चिपक गई।

उसकी चूचियों को खूब चूसने के बाद और उसकी चूचियाँ मींजने के बाद मैंने उसकी पैंटी खोलनी शुरू की।

वह शर्माने लगी।

ओह दोस्तो… मैं बता नहीं सकता कि कितनी ज्यादा सनसनी हो रही थी।

मैंने बहुत सी चूतें चोदी थीं, लेकिन आज इस कमसिन कली की चूत का भोसड़ा बनाने में मुझे बेहद उत्तेजना हो रही थी।

मेरी जवान बहन की कमसिन चूत… ओये होये… बहुत ही लज़ीज़ थी।

छोटी सी कमसिन सी मगर फूली हुई चूत… उस पर छोटी-छोटी सी झाँटें, जिसे उसने साफ कर ली थीं।

मैंने देर न करते हुए अपनी जीभ उसकी कुंवारी कमसिन बुर पर फेरना शुरू की।

उसी के साथ उसकी कामुक सिसकारियाँ भी निकलना शुरू हो गईं – ‘उहह भैया ओह…’

मैंने बुर को चाटते हुए ही उससे पूछा – कैसा लग रहा है?

वह मदहोश हो चुकी थी और मदहोश आवाज़ में बोली – ओह भैया… बहुत अच्छा लग रहा है।

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर पेल दी और फाँकों को अंदर से चाटने लगा था।

उसकी चूत ऐसी थी कि मन कर रहा था… बस उसे कच्चा ही खा जाऊँ।

मैंने बहुत देर उसकी चूत को चाटा, चूत चाटने का मज़ा लिया।

उसकी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी।

उसे मैं तब भी चाटता जा रहा था।

आप समझ सकते हैं कि एक जवान कुंवारी लड़की की चूत का रस कितना टेस्टी होगा।

बहुत देर तक उसकी चूत चाटने के बाद मैं सिक्सटी नाइन की पोज़ीशन में आया।

अब मैंने उसे बताया कि लंड को अच्छे से आइसक्रीम की तरह चूसना है।

मैं उसके ऊपर आ गया और मेरा लंड उसके मुँह में घुस गया था जबकि मेरी जीभ उसकी चूत में चल रही थी।

मैंने दोनों हाथ उसकी गांड के नीचे लगाए और उसे उठा-उठा कर चूत को चाटने लगा था।

इस सिक्सटी नाइन की पोज़ीशन में ही मैं नीचे और वह मेरे ऊपर आ गई।

अब वह मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत और गांड चाट रहा था।

फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया, उसकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया और बहुत देर उसके होंठों को चूसा।

चूचियाँ और चूत चूसने और चाटने के बाद मैंने अपना खड़ा और बड़ा साढ़े छह इंच का मोटा मर्दाना लंड तेल लगा कर उसकी नन्ही सी चूत के मुँह में रख कर धीरे-धीरे रगड़ना चालू कर दिया।

उसने अपनी आँखें डर के मारे बंद कर ली थीं।

मैंने जैसे ही थोड़ा सा लंड उसकी चूत में घुसाना चाहा, वह चिल्ला पड़ी और हटने लगी।

वह मुझे मना करने लगी।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए।

मैं उसे प्यार से चोदना चाहता था ताकि मुझे भी आगे से कुंवारी चूत फाड़ने का अनुभव प्राप्त हो जाए।

Episodes

सील टूट गई
भाग १ – कमसिन बदन का मज़ाJul 23, 2026

दोस्तों, यह कहानी दो भागों में है। पहले भाग में आप जानेंगे कि कैसे मेरी नज़र अपनी मौसी की जवान बेटी पर पड़ी, और कैसे हम दोनों के बीच धीरे-धीरे करीबी बढ़ी। दूसरे

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सील टूट गई
भाग २ – कुंवारी चूत की सील तोड़ी गईJul 23, 2026

दोस्तो, मैं आपको आगे बताता हूँ कि आखिर कैसे मैंने उसकी कुंवारी चूत का भोसड़ा बनाया। मैंने कहा – परी, एक बार लेकर तो देखो, बहुत मज़ा आएगा। पहली-पहली बार दर्द हो

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गांड का रास्ताJul 23, 2026

फिर एक दिन मैंने सोचा कि इसकी गांड मारी जाए। जैसे उसकी चूत में लंड बहुत मुश्किल से कई दिनों के इंतज़ार के बाद गया था, वैसे ही गांड में भी लंड नहीं जा रहा था। कभ

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