पकड़े गए · 10:31 · Jul 23
ट्रेन में टीटी ने पकड़ा
sumi
दोस्तों, आज की कहानी है एक जवां लडकी राधिका और उसके बॉयफ्रेंड अमन की। दोनों ने मौका पाकर ट्रेन की निजी बर्थ पर एक-दूसरे को महसूस करना शुरू कर दिया, लेकिन किसी क
दोस्तों, आज की कहानी है एक जवां लडकी राधिका और उसके बॉयफ्रेंड अमन की। दोनों ने मौका पाकर ट्रेन की निजी बर्थ पर एक-दूसरे को महसूस करना शुरू कर दिया, लेकिन किसी को क्या पता था कि टिकट चेकर उन्हें रंगे हाथों पकड लेगा और फिर वह खुद भी इस खेल में शामिल हो जाएगा। तो चलिए, शुरू करते हैं ये रोमांचक और गरम कहानी...
राधिका सिर्फ २२ साल की थी। गोरी, लंबी, घनी आँखें और भरे-भरे शरीर वाली ये लडकी अपने बॉयफ्रेंड अमन के साथ दिल्ली से मुंबई जा रही थी। अमन उसका कॉलेज का दोस्त था और दोनों पिछले दो साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। उन्होंने अपनी ट्रेन की दो बर्थ एक साइड वाले कंपार्टमेंट में बुक करवाई थी, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो।
रेलवे स्टेशन पर चढते ही दोनों बहुत खुश थे। रात का वक़्त था, करीब ११ बजे, और उनका कंपार्टमेंट पूरी तरह खाली था। बाकी बर्थें भी खाली पडी थीं। अमन ने अपना सामान ऊपर रखा और राधिका को नीचे की बर्थ पर बिठाया। ट्रेन ने धीरे-धीरे चलना शुरू किया और देखते-ही-देखते स्टेशन पीछे छूट गया।
राधिका ने जींस और फिट टॉप पहना हुआ था। उसके बडे-बडे नितंब जींस में कसकर बंधे हुए थे और ऊपर का टॉप उसके बडे मम्मों को उभार रहा था। अमन उसे देखता रह गया। अमन ने धीरे से राधिका के पास जाकर उसका हाथ पकडा और कान में कहा, "आज तो पूरी रात हम अकेले हैं।"
राधिका ने शरमाते हुए उसके हाथ को अपनी जांघ पर रख दिया। अमन के हाथ राधिका की मोटी जांघों पर फिरने लगे। उसने धीरे-धीरे उसकी जींस की बटन खोल दी और अंदर हाथ डाला। राधिका की सांसें तेज़ होने लगीं। उसने अमन को अपने पास खींचा और दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगा लिया।
ट्रेन की बर्थ पर वे एक-दूसरे के चेहरे को चूमने लगे। अमन ने अपनी जीभ राधिका के गालों और गर्दन पर फिरानी शुरू कर दी। राधिका बार-बार हाँफ रही थी। उसकी चूत में नमी फैलने लगी। अमन ने उसका टॉप ऊपर चढाया और उसके बडे, कोमल मम्मों को अपने होठों से सहलाने लगा। राधिका पूरी तरह मस्ती में आ गई।
"अमन... मत कर... कहीं कोई आ गया तो..." राधिका ने धीरे से कहा, लेकिन उसके शरीर ने अमन को रोकने से इनकार कर दिया।
अमन ने उसकी बात को नज़रअंदाज करते हुए अपना हाथ उसकी चूत की तरफ बढाया और उंगलियाँ अंदर घुसाने लगा। राधिका की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। वह कराहने लगी। अमन उसकी चूत को रगडने लगा और उसका मुँह उसके मम्मों पर लगा रहा। दोनों का प्यार अपनी चरम सीमा पर था।
तभी अचानक पर्दा हटा और एक सीटी बजी—
"टिकट! टिकट दिखाओ!"
दोनों चौंककर अलग हो गए। सामने खडा था — टिकट चेकर। वो एक ३५ साल का, लंबा-चौडा, हट्टा-कट्टा आदमी था। उसकी दाढी और मूंछें थीं और आँखों में शरारत भरी चमक थी। उसने उन्हें करवट बदलते देखा और मुस्कुरा दिया।
"तो ये क्या चल रहा है?" उसने मज़ाकिया अंदाज़ में पूछा।
अमन ने जल्दी से कपडे सँभाले और टिकट निकालकर दिया। टिकट चेकर ने टिकट देखा और फिर राधिका की गोरी जांघों और उसके बिखरे बालों पर नज़र डाली। उसकी नज़रें राधिका के उभरे हुए मम्मों पर टिक गईं, जो अब भी टॉप से बाहर झाँक रहे थे।
"बहुत अच्छा। तो आप लोग अकेले हो?" टिकट चेकर ने पूछा।
अमन ने हाँ में सिर हिलाया।
टिकट चेकर ने बर्थ के बगल में बैठते हुए कहा, "तो अगर मैं कहूँ कि मुझे इस मामले में रिपोर्ट करनी पडी तो?"
राधिका घबरा गई। उसने अमन की तरफ देखा। दोनों को डर था कि कहीं वो पुलिस या फिर उनके परिवार वालों को न बता दे।
अमन ने हाथ जोडते हुए कहा, "सर, माफ़ कर दो। हमसे गलती हो गई।"
लेकिन टिकट चेकर ने शरारती नज़र से राधिका को देखते हुए कहा, "गलती? नहीं... ये तो कमाल है। इतनी सुंदर लडकी के साथ... बल्कि मैं खुद भी इस मज़े का हिस्सा बनना चाहूँगा।"
यह सुनकर राधिका और अमन दोनों ही हैरान रह गए। टिकट चेकर ने आगे कहा, "अगर तुम दोनों राज़ी हो, तो मैं इस बात को दबा सकता हूँ। नहीं तो..."
राधिका की आँखों में डर और उत्तेजना दोनों थीं। उसने अमन की तरफ देखा। अमन को अजीब-सी उत्तेजना हो रही थी। वह सहम गया।
टिकट चेकर ने अपनी बेल्ट खोली और अपनी वर्दी उतारनी शुरू कर दी। उसका बडा-सा लंड पहले से ही खडा हो चुका था। उसने राधिका के करीब बैठते हुए उसकी जींस पूरी तरह नीचे खींच ली। राधिका ने विरोध नहीं किया।
"अब तुम उसकी चूत को चाटो," टिकट चेकर ने अमन को आदेश दिया।
अमन ने झिझकते हुए राधिका के नीचे मुँह लगाया और उसकी चूत को जीभ से सहलाने लगा। राधिका कराह उठी। तभी टिकट चेकर ने अपना कडा-सा लंड राधिका के मुँह के सामने कर दिया और धीरे से उसके होठों पर रखा।
"चूस, मेरी बिटिया।" उसने आदेश दिया।
राधिका ने पहले तो झिझक दिखाई, फिर धीरे-धीरे उसने उस बडे से लंड को अपने होठों में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। उसकी जीभ लंड के गोले पर गोल-गोल घूमने लगी।
टिकट चेकर की साँसें तेज़ हो गईं। उसने राधिका के बालों को पकडकर उसका सिर आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया। वह जोर-जोर से उसके मुँह में अपना लंड घुसा रहा था और हर बार राधिका के गले के पीछे तक वह लंड पहुँच रहा था। राधिका की आँखों में पानी आ गया, लेकिन वह रुकी नहीं।
इधर अमन की जीभ राधिका की चूत के भीतर गहराई तक जा रही थी। वहाँ से गीली चिकनाई बह रही थी। अमन ने अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर डाल दीं और तेज़ी से हिलाने लगा। राधिका का शरीर हिल रहा था। वह एक साथ दोनों का मज़ा ले रही थी।
कुछ देर बाद टिकट चेकर ने अमन को पीछे हटने को कहा और खुद राधिका के पीछे आ गया। उसने राधिका की कमर पकडी और उसके बडे-बडे गोल नितंबों को सहलाया। फिर धीरे से उसने अपना भारी-भरकम लंड राधिका की चूत के दरवाज़े पर रखा और एक जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर घुसा दिया।
"आह!" राधिका जोर से चीखी। उसकी चूत उस लंड को समेटने की कोशिश कर रही थी।
टिकट चेकर ने उसे आगे से पकड लिया और रफ़्तार से उस पर धक्के मारने लगा। उसका लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। राधिका के मम्मे जोर-जोर से हिल रहे थे। अमन को देखते हुए राधिका को और भी मज़ा आ रहा था।
अमन ने अपना लंड भी निकाल लिया और उसने खडे होकर टिकट चेकर को राधिका की चूत में धक्के मारते देखा। फिर टिकट चेकर ने अमन को आदेश दिया, "आगे से उसके मम्मे चाट!"
अमन ने तुरंत राधिका के सामने घुटने टेके और उसके भरे हुए, कोमल मम्मों को अपने मुँह में ले लिया। उसने जीभ से उसके निप्पलों को घुमाना शुरू कर दिया। तीनों एक साथ एक गहरी उत्तेजना में बह गए।
ट्रेन की तेज़ रफ़्तार के साथ पर्दे के अंदर तीनों का ये खेल चरम पर था। टिकट चेकर ने राधिका की चूत में तेज़ धक्के मारना जारी रखा। राधिका की चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वह बार-बार अमन को अपने मम्मे चूसने के लिए और ज़ोर से दबा रही थी।
कुछ ही देर बाद टिकट चेकर ने कहा, "अब मैं छोडूंगा, अपना रस तुम्हारी चूत में भर दूंगा!"
उसने अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी और अचानक एक लंबी, गहरी साँस के साथ अपना सारा वीर्य राधिका की चूत के अंदर छोड दिया। राधिका का भी उसी वक़्त स्खलन हो गया। उसके शरीर में कंपन पैदा हो गया। अमन भी अपनी उत्तेजना पर काबू न पा सका और उसने भी राधिका के मम्मों पर अपना वीर्य छोड दिया।
तीनों लंबी साँस लेते हुए वहाँ ढेर हो गए। कई मिनट तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर टिकट चेकर ने अपनी वर्दी पहनी, मुस्कुराया और बोला, "टिकट ठीक है। अगली बार पर्दा ठीक से बंद कर लेना।"
और वह वहाँ से चला गया।
राधिका और अमन ने एक-दूसरे को देखा। उनके चेहरों पर शर्म और उत्तेजना मिश्रित थी। उन्होंने चुपचाप एक-दूसरे के हाथ पकड लिए और बाकी की रात खामोशी से कट गई। लेकिन वो रात कभी भी उनके दिलों से नहीं निकल सकती थी।
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