विवाहित महिलाओं की कामुक कहानियाँ · 15:30 · Aug 13
रंडी बीवी
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Niharika
मेरा नाम अनुराधा है। सब मुझे अनु बुलाते हैं। मैं 32 साल की हूँ, एक मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग हेड हूँ, और 5 साल से विक्रांत — यानी विकी — की बीवी हूँ। बाहर
मेरा नाम अनुराधा है। सब मुझे अनु बुलाते हैं। मैं 32 साल की हूँ, एक मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग हेड हूँ, और 5 साल से विक्रांत — यानी विकी — की बीवी हूँ। बाहर से देखने वाला कहेगा — "क्या परफेक्ट जोड़ी है।" पर जिसने मेरे अंदर की आग देखी हो, वो जानता है कि मैं सिर्फ दिखावे की गुड़िया थी, एक ऐसा शो-पीस जो विकी को उसके दोस्तों के सामने 'स्टेटस सिंबल' लगता था। असल में विकी को मुझसे प्यार नहीं था, उसे मेरे 'होने' से प्यार था — एक खूबसूरत बीवी जो उसके बिजनेस डिनर में उसकी बाज़ू पकड़े खड़ी रहे, और बिस्तर में बिना आवाज़ के सारे काम कर ले।
मैंने 5 साल विकी के साथ सेक्स किया, पर कभी 'क्लाइमेक्स' नहीं हुई। वो 5 मिनट में खत्म हो जाता, करवट लेता और सो जाता। मैं उसके बगल में पड़ी सोचती — "क्या मेरी बॉडी में कोई खराबी है? क्या मैं इतनी बुरी हूँ कि वो मुझे खत्म करने की जहमत तक नहीं उठाता?" मैंने किताबें पढ़ीं, वीडियो देखे, खुद को समझाने की कोशिश की — पर हर बार उसकी ठंडी बाँह मुझे बताती, "तू सिर्फ एक बीवी है, कोई प्रेमिका नहीं।"
छह महीने पहले सब कुछ बदल गया। विकी नशे में घर आया और उसका फोन अनलॉक पड़ा था। मैं जानती थी कि फोन चेक करना गलत है, पर कभी-कभी औरतें सच जानने के लिए गलत बन जाती हैं। मैंने उसका व्हाट्सएप खोला। वहाँ एक ग्रुप था — "VIP मस्ती" — जिसमें वो अपने दोस्तों के साथ लड़कियों के वीडियो शेयर करता था। और फिर मुझे उसकी सेक्रेटरी की वीडियो मिली — विकी उसे होटल के बाथरूम में ले गया था, जहाँ हम दोनों ने अपनी शादी की सालगिरह मनाई थी। अगली क्लिप में मेरी बेस्ट फ्रेंड नेहा थी, जो मेरे घर चाय पीने आती थी। विकी ने उसे मेरे ही बेड पर लिटाया था, उसी चादर पर जिस पर मैं सोती थी।
मुझे रोना नहीं आया। मुझे गुस्सा भी नहीं आया। मुझे बस एक ठंडी सी सफाई महसूस हुई — जैसे किसी ने मेरी आँखों पर पड़ा पर्दा हटा दिया हो। मैंने फोन वापस रखा, और उस रात जब विकी ने मुझे गले लगाया, तो मैंने भी उसे गले लगाया, पर मेरा दिमाग एक नई स्क्रिप्ट लिख रहा था। मुझे एहसास हुआ कि मैं 5 साल से एक ऐसे इंसान के साथ हूँ जो मुझे 'इंसान' नहीं, बल्कि एक 'प्रॉपर्टी' समझता है — जो बाहर से चमकती है, अंदर से खोखली। पर मेरा अंदर खोखला नहीं था। मेरे अंदर आग थी, बस उसे जलाने वाला कोई नहीं था।
तभी मेरे फोन पर कॉलेज रीयूनियन का मैसेज आया — "इस शनिवार, शाम 7 बजे, पाँच सितारा होटल, ड्रिंक्स फ्री।" मेरी साँसें तेज़ हो गईं। क्योंकि मुझे पता था कि उस रीयूनियन में आयुष होगा — मेरा कॉलेज का पहला बॉयफ्रेंड, वो लड़का जो मुझे लाइब्रेरी में कविताएँ सुनाता था और जिसकी आँखों में मेरे लिए दीवानगी थी। और रोहित भी होगा — वो जिम-फ्रैक्चर लड़का जो बिना शर्ट के कैंटीन में बैठता था, जिसकी बाइसेप्स पर मेरा नाम टैटू था, जो मुझे एक बार कह चुका था — "तू जब चाहे, मेरे पास आना, मैं तुझे कभी मना नहीं करूँगा।" मैंने उन दोनों से 10 साल पहले अलग होना चुना था क्योंकि मुझे 'सेटल्ड लाइफ' चाहिए थी — पर उस सेटल्ड लाइफ ने मुझे कभी सेटल नहीं होने दिया।
मैंने विकी से पूछा, "मुझे रीयूनियन जाना है।" उसने बिना आँख उठाए कहा, "जाओ, मुझे पूरा भरोसा है तुम पर।" उसकी उस 'भरोसेमंद' वाली मुस्कान पर मुझे हँसी आई — क्योंकि असली भरोसा तो उसने नेहा पर किया था, मुझ पर नहीं। पर मैंने कुछ नहीं कहा। बस उस शनिवार को मैंने वो ब्लू सीक्विन ड्रेस पहनी जो विकी ने मुझे पिछले जन्मदिन पर दी थी, और जो उसने कभी मुझ पर नहीं देखी थी। मैंने हाई हील्स पहनीं, लिपस्टिक लगाई, और दर्पण में अपने आप से कहा — "आज तू बीवी नहीं है, आज तू वही अनु है जिसे कॉलेज में सब चाहते थे।"
होटल पहुँची तो संगमरमर के फर्श पर मेरी हील्स की आवाज़ गूँज रही थी। बॉलरूम में बिजी लाइटें, शराब के गिलासों की खनक, और पुराने चेहरे। सब मुझे देख रहे थे, पर मेरी नज़र सिर्फ दो लोगों पर थी। आयुष — अब थोड़ी सफ़ेद दाढ़ी, ब्लेज़र, चश्मा, और वही शरारती मुस्कान। उसने मुझे देखते ही कहा — "अनु, तू तो आज भी वही हॉट दिखती है जैसे थर्ड ईयर में लगती थी।" मैंने उसके कान में कहा — "हॉट तो तब भी थी, पर तब मुझे नहीं पता था कि इस हॉट का क्या करना है।"
तभी रोहित आया — जींस, टैंक टॉप, बिना शर्ट के बनिया, गोल्ड चेन, और वही पुरानी 'बैड बॉय' वाइब। उसने मुझे देखा और सीधा कहा — "पाँच साल बीवी बनके कैसा लगा? बता, हम दोनों में से कौन बेहतर था?" मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया — "ये तो आज रात पता चलेगा, रोहित। मैं अब क्लास में नहीं हूँ, मैं रिजल्ट देखने आई हूँ।"
ड्रिंक्स के बाद जब बाकी लोग डांस करने लगे, तो आयुष ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला — "हम तीनों को बात करनी चाहिए। प्राइवेट में।" मैंने बिना देर किए हाँ कह दी। रोहित ने पहले से ही एक सूट बुक कर रखा था — ऊपर की मंज़िल पर, शहर की रोशनियों के सामने। जैसे ही लिफ्ट में हम तीनों सवार हुए, मैंने अपनी साँस रोकी। मुझे पता था कि अब पीछे मुड़ना नहीं है। लिफ्ट के शीशे में मैंने खुद को देखा — वही अनु जो 5 साल से किसी और की परछाई थी, अब अपनी परछाई बन रही थी।
सूट में पहुँचते ही मैंने अपनी पर्स से फोन निकाला और विकी की वीडियो उन दोनों को दिखाई। आयुष ने चश्मा उतारा, रोहित ने अपनी चेन उतारी। आयुष बोला — "तो तू बदला लेना चाहती है?" मैंने कहा — "नहीं, मैं बदला नहीं लेना चाहती। मैं बराबर होना चाहती हूँ। वो मुझसे वही कर रहा है जो मुझे मालूम है, पर मैंने कभी उसे रोका नहीं क्योंकि मैं डरी हुई थी। अब मुझे डर नहीं है।"
रोहित ने मेरी ठुड्डी पकड़ी — "तो आज रात क्या चाहिए?" मैंने अपनी ड्रेस का ज़िप पीछे से खोला — वो सरकती हुई मेरे पैरों पर गिरी। मैं ब्लैक ब्रा और पैंटी में खड़ी थी, और मैंने कहा — "आज रात मुझे वह सब चाहिए जो मेरे पति ने मुझसे 5 साल में छुपाया। मैं आज 'बीवी' नहीं हूँ — मैं वही अनु हूँ जिसे तुम दोनों आज भी याद करते हो। मुझे दिखाओ कि तुम 10 साल में क्या सीखे हो।"
पहले रोहित ने मुझे उठाकर बिस्तर पर लिटाया। उसके हाथ मेरी ब्रा के हुक पर थे — और उसकी उँगलियाँ मेरी जाँघों पर सरक रही थीं। जब उसने मेरी ब्रा खोली, तो उसके होंठ मेरे निप्पल पर गिरे — पर हल्के से, प्यार से, जैसे कोई नाज़ुक चीज़ को तोड़ने से डर रहा हो। लेकिन फिर उसके दाँतों ने हल्का दबाव दिया और मुझसे एक चीख़ निकल गई — वह चीख़ जो विकी ने 5 साल में कभी नहीं सुनी थी। रोहित धीरे-धीरे मुझे चूमता हुआ नीचे उतरा — गर्दन, सीने का बीच, पेट, और फिर उस रेखा तक जहाँ मेरी पैंटी खत्म होती थी। उसने पैंटी को बगल में सरकाया और अपनी जीभ मेरी चूत पर रखी — इतना हल्का कि मुझे बिजली का झटका लगा। मैंने अपने बाल पकड़ लिए और उसके सिर को और नीचे दबाया। वो 10 मिनट तक मुझे जीभ से खिलाता रहा — गोल-गोल, ऊपर-नीचे — जब तक मेरा पूरा शरीर काँप नहीं गया। मैंने अपनी पहली असली क्लाइमेक्स महसूस की — मेरी जाँघें सिकुड़ गईं, मेरी ऐड़ियाँ बिस्तर पर खुद को रगड़ रही थीं, और मेरे मुँह से बस इतना निकला — "रुको... रुको... बहुत हो गया..." पर रोहित ने नहीं रुका।
उसने मुझे करवट दी — डॉगी स्टाइल। मुझे उसका लंड पीछे से महसूस हुआ — मोटा, गरम, और बिना कंडोम के। जैसे ही उसने एक धक्का दिया, मुझे लगा मेरी साँसें रुक गईं। विकी कभी मुझे इतना अंदर नहीं पहुँचा पाया था। रोहित ने तेज़, गहरी और कच्ची चुदाई की — मेरी उँगलियाँ चादर को नोच रही थीं, मेरा चेहरा तकिए में दबा था ताकि आवाज़ न निकले। पर 5 मिनट बाद मैं खुलकर चीखने लगी — और उसी वक़्त आयुष ने मुझे पलटा। उसका तरीक़ा बिल्कुल अलग था — धीमा, गहरा, और बातों से भरा। उसने मुझे अपनी गोद में बिठाया, मेरी पीठ उसके सीने पर थी, उसके हाथ मेरे स्तनों पर — और उसका लंड मेरे अंदर था, पर वो चलता नहीं, बल्कि थोड़ा-थोड़ा घुमाता था। वो मेरे कान में कह रहा था — "अनु, असली मज़ा भागने में नहीं, रुकने में है। तुझे अपनी बॉडी को महसूस करना होगा, उसे जल्दी खत्म नहीं करना।" उसने अपनी उँगलियाँ मेरे क्लिटोरिस पर रखीं और धीरे-धीरे गोल-गोल घुमाई — जबकि उसका लंड अंदर स्थिर था। दोनों तरफ की सेंसेशन इतनी तेज़ थी कि मेरे पैर काँपने लगे। फिर उसने मुझे लिटाया और लंबे-लंबे धक्के देने शुरू किए — हर धक्का पूरा अंदर, हर बाहर खालीपन जो फिर से भर जाता। मैं 25 मिनट तक उसके साथ रही, और तीन बार क्लाइमेक्स हुई। मैंने अपने पति के लिए 5 साल में जितना नहीं किया, उतना एक ही रात में दो लड़कों के साथ कर लिया।
मगर रुकना बाकी था। रोहित ने मेरी तरफ देखा — "एक साथ चाहिए?" मैंने हाँ कहा। ये वो पल था जब मैंने खुद को आईने में देखा — मेरे पसीने से भीगे बाल, मेरे स्तनों पर लाल निशान, मेरी जाँघों पर उनके थूक के निशान। मैं शर्मिंदा नहीं थी, मैं गर्व महसूस कर रही थी। रोहित नीचे लेटा, मैंने उसके लंड को अपनी चूत में लिया। फिर आयुष ने लुब्रिकेंट लगाकर मेरे गांड पर हाथ रखा — "दर्द होगा, पर रुकना मत।" जब उसने धीरे-धीरे प्रवेश किया तो मुझे जलन हुई, पर रोहित ने मुझे चूमा और बोला — "अब हम दोनों एक साथ चलेंगे।" उन्होंने ताल मिलाई — एक अंदर जाता, दूसरा बाहर। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा शरीर दो हिस्सों में बँट गया, और दोनों हिस्से स्वर्ग में तैर रहे हैं। मैंने अपना फोन उठाकर पूरी हरकत रिकॉर्ड की — मेरा चेहरा, उनके चेहरे, मेरे पसीने की बूँदें, चादर पर गिरे मेरे नाखूनों के निशान — सब कुछ। जब वो दोनों खत्म हुए, तो मैं बीच में पड़ी थी — साँसें भारी, शरीर सुन्न, मन पूरी तरह खाली और शांत। किसी ने बात नहीं की। बस तीनों ने पानी पिया, कुछ देर चुप रहे, और फिर एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। मुझे पहली बार अपनी बॉडी पर गर्व हुआ — क्योंकि उस रात मेरी बॉडी ने मुझे वह दिया जो मेरा पति कभी नहीं दे सका — एहसास, सम्मान और खुशी।
सुबह 5 बजे वो दोनों गहरी नींद में थे — रोहित करवट लिए, आयुष पीठ के बल। मैंने उठकर अपनी ड्रेस पहनी, हील्स नहीं पहनी, बस नंगे पाँव खड़ी होकर अपना फोन उठाया। मैंने विकी को तीन सबसे गरम क्लिप्स भेजीं — जिसमें मैं पहले रोहित के साथ थी, फिर आयुष के साथ, और फिर दोनों के साथ एक साथ। साथ में एक वॉयस नोट डाला — "गुड मॉर्निंग प्यारे पति। मेरा कॉलेज रीयूनियन बहुत अच्छा गुज़रा — आयुष और रोहित से मिलकर बहुत अच्छा लगा। हमने पुरानी यादें ताज़ा कीं — बहुत गहराई से। आपको भी अगर मज़ा आ रहा हो तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं, पर अब हम बराबर हैं। ये वीडियो क्लिप्स आपके फोन पर सुरक्षित हैं, और ड्रॉपबॉक्स में भी। अगर तलाक की बात आई और मुझे एक पैसा भी न मिला, तो ये क्लिप्स आपके पापा, आपके बिजनेस पार्टनर, और आपकी नई गर्लफ्रेंड नेहा को चली जाएँगी। सोच लीजिएगा।"
10 मिनट बाद विकी ने रिप्लाई किया — "मैं तो तुझसे यही उम्मीद कर रहा था, अनु। मुझे पता था तू कॉलेज के उन दोनों के पास जाएगी। तू क्या सोचती है — मैंने तुझे रीयूनियन में जाने क्यों दिया? मैं चाहता था कि तू आज़ाद हो, क्योंकि मुझे खुद तीनों के साथ मज़ा चाहिए। मेरी नई गर्लफ्रेंड भी तैयार है — कल रात 8 बजे, हम चारों मिलते हैं? कोई हद नहीं, बस मज़ा।"
मैंने वो मैसेज पढ़ा — और मुझे पहले गुस्सा आया, फिर हँसी, और फिर एक अजीब सी शांति। मैंने सोचा — "मैं 5 साल से सोचती थी कि मेरा पति बोरिंग है, पर असल में वो मुझसे भी ज्यादा चालाक निकला। उसने मुझे इस्तेमाल नहीं किया, उसने मुझे अपनी राह पर चलने के लिए उकसाया।"
मैंने उसे रिप्लाई किया — "हाँ। शाम 8 बजे। आओ, हम चारों मिलेंगे।"
पर फोन रखने के बाद मैंने अपनी आँखें बंद की और सोचा — क्या मैं सच में वहाँ जाऊँगी? या मैंने कहानी का अंत इस तरह लिखा कि उसे लगे कि मैं जाऊँगी, पर असल में मैं उसे एक खाली होटल के कमरे में बिठाकर खुद कोर्ट में तलाक के कागज़ात भरने चली जाऊँगी? क्योंकि एक बात मैंने उस रात सीखी — जिस औरत को अपने शरीर का मालिक होने का एहसास हो जाता है, वो कभी किसी के फैसले पर नहीं जीती। वो खुद फैसले लेती है।
मैंने उस सुबह होटल की खिड़की से बाहर देखा — सूरज निकल रहा था, शहर जाग रहा था, और मैं वही अनु थी जो कल थी — पर अब मैं बीवी नहीं थी, मैं अपनी मालकिन थी। आयुष और रोहित अभी भी सो रहे थे — उन्हें पता भी नहीं था कि उन्होंने मुझे एक ऐसा हथियार दिया है जो मुझे कभी कमज़ोर नहीं पड़ने देगा। चाहे विकी के साथ रहूँ, चाहे अकेली, चाहे किसी और के साथ — मेरी बॉडी अब मेरे हुक्म पर चलेगी, किसी और के नहीं।
मैंने पर्स उठाया, दरवाज़ा खुला छोड़ा, और बिना पीछे देखे होटल से बाहर निकल गई। मेरी हील्स फिर से फर्श पर बज रही थीं, पर इस बार वो आवाज़ कमज़ोरी की नहीं, ताकत की थी।
ये कहानी मेरी है। और अब मैं चाहूँ तो इसे यहीं खत्म कर दूँ, या चाहूँ तो एक और पन्ना जोड़ दूँ — पर अभी मैं इसे यहीं छोड़ती हूँ, क्योंकि सबसे अच्छी कहानी वही होती है जो पाठक के दिमाग में खत्म हो, किताब में नहीं।

